चिड़ियों की मीटिंग

अहले सुबह नींद खुली मीठी, गूँजती आवाज़ों से.

देखा बाहर परिंदों की सभा है.

शोर मचाते-बतियाते किसी गम्भीर मुद्दे पर, सभी चिंतित थे

– इन इंसानों को हुआ क्या है?

बड़े शांत हैं? नज़र भी नहीं आते?

कहीं यह तूफ़ान के पहले की शांति तो नहीं?

हाल में पिंजरे से आज़ाद हुए हरियल मिट्ठु तोते ने कहा –

ये सब अपने बनाए कंकरीट के पिंजरों में क़ैद है.

शायद हमारी बद्दुआओं का असर है.

ज़िंदगी के रंग – 198

दुनिया में सुख हीं सुख हो,

सिर्फ़ शांति हीं शांति और ख़ुशियाँ हो.

ऐसा ख़ुशियों का जहाँ ना खोजो.

वरना भटकते रह जाओगे.

जीवन और संसार ऐसा नहीं.

कष्ट, कोलाहल, कठिनाइयों से सीख,

शांत रह कर जीना हीं ख़ुशियों भरा जीवन है……

धृष्ट चाँद

पूनम का धृष्ट चाँद बिना पूछे,

बादलों के खुले वातायन से

अपनी चाँदनी को बड़े अधिकार से

सागर पर बिखेर गगन में मुस्कुरा पड़ा .

सागर की लहरों पर बिखर चाँदनी

सागर को  अपने पास बुलाने लगी.

लहरें ऊँचाइयों को छूने की कोशिश में

ज्वार बन तट पर सर पटकने लगे .

पर हमेशा की तरह यह मिलन भी

अधूरा रह गया.

थका चाँद पीला पड़ गया .

चाँदनी लुप्त हो गई .

सागर शांत हो गया .

पूर्णिमा की रात बीत चुकी थी .

पूरब से सूरज झाँकने लगा था .