स्याही वाली क़लम

अब स्याही वाली क़लम से लिखना छोड़ दिया है.

कब टपकते  आँसुओं से 

 पन्ने पर पर अक्षर अौ शब्द फैल जाते  हैं।

 कब आँखें धुँधली हो जातीं हैं।  

पता हीं नहीं चलता है।