वक्त

कहते हैं,

बुरा हो या भला हो,

हर वक्त गुजर जाता है।

पर कुछ वक्त कभी मरते नहीं,

कभी गुजरते नहीं।

जागते-सोते ख़्वाबों ख़्यालों में

कहीं ना कहीं,

शामिल रहते हैं।

ज़िंदगी का हिस्सा बन कर।

वक़्त

समय कब कहता है – वह सही है?

शिद्दत से सही वक्त ढूँढना पङता है।

कई बार सही समय ढूँढने में

वक्त हीं फिसल जाता है हाथों से।

 

समय मौन है !

समय गूंगा नहीं

बस मौन है,

वक्त , वक्त पर बताता है,

किसका वक्त है

अौर 

किसका कौन है!

 

 

Unknown

ठोकर

वक्त ने गुजरते-गुजरते

पलट कर पूछा –

जब भी होते हो खुश या दुखी ,

कहते हो – यह वक्त गुजर जायेगा।

फिर मेरे गुजरने पर याद क्यों करते हो?

हमने कहा, क्योंकि

तुम्हारी ठोकरों ने  हमें तराशा है………………

काल चक्र

जिंदगी के हसीन  पलों को

कितनी  भी बार कहो – थम जा !!

पर यह कब रुकता है?

पर दर्द भरे पलों का

बुलाअो या ना बुलाअो,

लगता है यह खिंचता हीं चला जा रहा है………

पता नहीं समय का खेल है या मन का?

पर इतना तो तय है –

वक्त बदलता रहता है………….

यह काल चक्र चलता रहता है।

जैसा भी समय हो,    बीत हीं जाता है ……….

 

 

 

जिंदगी के रंग – 27

बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,

कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले

बस कुछ पल के लिये हैं।

जिंदगी की तरह……

बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..

जी लो जी भर के।

वक्त -कविता 

mirror

कभी तो.थोड़ा थम जा

ऐ वक्त

साँस लेने दे.

ज़रा सुस्ताने दे.

घड़ी की ये सूईया भी

भागी जा रही हैं

बिना पैरों ,

अपनी दो हाथों के सहारे.

कब मुट्ठी के रेत की

तरह तुम फिसल गये वक्त.

पता ही नहीँ चला.

वह तो आईना था.

जिसने तुम्हारी चुगली कर दी.

दिल – कविता

कुछ लोग बड़ी बड़ी 

बातें करते हैं.

पर किसी का “दिल न दुखाना”,

सीखने में बड़ा वक्त 

लगा देते हैं.

और 

जब अपने पर आता हैं ,

तब उन्हें , अपना  दुख ही सबसे 

बड़ा  नज़र आता हैं.

इस लिये , कहते हैं……

किसी का दिल ना दुखाना

 

 

दिल १