ज़िंदगी के रंग – 197

जीवन के संघर्ष हमें रुलातें हैं ज़रूर,

लेकिन दृढ़ और मज़बूत बनातें हैं.

तट के पत्थरों और रेत पर

सर पटकती लहरें बिखर जातीं हैं ज़रूर.

पर फिर दुगने उत्साह….साहस के साथ

नई ताक़त से फिर वापस आतीं हैं,

नई लहरें बन कर, किनारे पर अपनी छाप छोड़ने.

जिंदगी के रंग – 27

बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,

कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले

बस कुछ पल के लिये हैं।

जिंदगी की तरह……

बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..

जी लो जी भर के।

रेत अौर समंदर

समंदर हँसा रेत पर – देखो हमारी गहराई अौ लहराती लहरें,

तुम ना एक बुँद जल थाम सकते हो, ना किसी काम के हो।

रेत बोला —

यह तो तुम्हारा खारापन बोल रहा है,

वरना तुम्हारे सामने – बाहर  अौर अंदर भी हम हीं  हम हैं

— बस रेत हीं रेत !!!

life- poetry जिंदगी -कविता

The philosophy of life and sea waves are similar.

They return , whatever is give  to them.

जिंदगी अौर सागर की लहरें

एक सी लगती हैं। 

जो दो
कभी ना कभी वापस
लौटाती हैं जरुर।

जिंदगी अौर सागर का फ़लसफा

शायद एक है।

coco