नज़्म बना जियेगें ज़िंदगी!

Out beyond ideas of wrongdoing and rightdoing there is a field. I’ll meet you there. When the soul lies down in that grass the world is too full to talk about. ❤  Rumi.

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लम्हों को  गँवाते गँवाते

निकल गई उम्र-ए-रफ़्ता।

गर मिले  फिर इत्तिफ़ाक़ से. 

 नज़्म बना जियेगें ज़िंदगी।

सही-गलत से दूर…मिलेंगे उस जगह….

जहाँ आत्मा,  शरीर के  लिबास में ना हो।

 

 

 

उम्र-ए-रफ़्ता  –  past life,  गुज़री हुई उम्र

जिंदगी के रंग – 27

बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,

कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले

बस कुछ पल के लिये हैं।

जिंदगी की तरह……

बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..

जी लो जी भर के।