ख़ामियाज़ा

कुछ लोग दिल में होते हैं ज़िंदगी में नहीं।

कुछ ज़िंदगी में होते है दिल में नहीं।

जो अपने रूह और दिल में जगह दें।

उन्हें हीं ज़िंदगी,

रूह और दिल का हिस्सा बनायें,

चाहे वे दूर हों या पास,

ग़र ना हो चाहत टूटने-बिखरने की।

सिर्फ़ पास और साथ के लिए

साथ ना निभाएँ।

रिश्ते अपनेपन के लिए होतें हैं,

ख़ामियाज़ा भरने के लिए नहीं।

ख़ुश रहने के लिए

खुशियां न तो मिलती है हाट-बाज़ार में|

ना पढ़ाया जाता है किसी पाठशाला में |

कुछ समय की खुशियाँ पा सकते हैं,

मादक नशा, और दुनियावी बातों में।

पर हमेशा खुश रहने के लिए,

झाँकना पड़ता है अपने दिल में।

अगर दिल औ रूह में रूहानियत हो,

तो हर हाल में खुश रहना आ जाता है।

Topic by YourQuote.

सुकून भरा दिल और रूह

सुकून भरा दिल और रूह

चंद बूँदे बरसे आसमान से।

खुला आकाश फुसफुसाया कानों में।

चैन पाने के लिए चंद क़तरे हम भी बरस जाने देते हैं,

कालिमा भरे नभ से, स्वच्छ नभ पाने के लिए।

आज़ाद छोड़ दे एहसासों औ दर्द को

बरस कर बह जाने के लिए।

ग़र पाना है सुकून भरा दिल और रूह।

Psychological fact –

Normal crying is emotional cathartic. It does have a soothing and relaxing effect. When we cry, our heart rate and breathing slow down a little and we start to calm down. We might even experience a mood boost after a good cry. Crying is useful for helping people release and express their suppressed or repressed emotions.

(Dr J Chan, a clinical psychologist at the Hong Kong Psychological Counselling Centre in Mong Kok)

मुलाक़ात

ऐसा भी क्या जीना?

पूरी ज़िंदगी साथ गुज़र गई।

पर ना अपने आप से बात हुई,

ना तन की रूह से मुलाक़ात हुई।

हवा पानी

 

 

 

जब सुना था पानी बिकेगा बोतलों में।

सोंचा था कौन ख़रीदेगा ?

प्यास बुझाता दरिया का पानी,

 सांसे महकाती दरख़्तों से गुजरती हवा,

आज  बिक रहे हैं  करोड़ों-अरबों में।

पानी आज शर्म से पानी पानी है।

खामोशी में डूबे बयार की अब शर्माने की बारी है।

  बोतल में बंद हवा-पानी प्राण दायिनी बन गई है।

इनके गुलाम रूह अब आजादी पाएंगे कैसे?

 

ज़हन

अर्श….आसमान में चमकते आफ़ताब की तपिश और

महताब की मोम सी चाँदनी

ज़हन को जज़्बाती बना देते हैं.

सूरज और चाँद की

एक दूसरे को पाने की यह जद्दोजहद,

कभी मिलन  नहीं होगा,

यह जान कर भी एक दूसरे को पाने का

ख़्याल  इनके रूह से जाती क्यों नहीं?

 

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अर्थ – 

अर्श-आसमान।

आफ़ताब- सूरज।

महताब- चाँद।

ज़हन – दिमाग़।

 

जिंदगी के रंग- 193

हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।

कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।

हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।

क्या हम आजाद हैं?

या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?