प्राचीनतम पाठशाला

एक दिन मौका मिला जीवन के

प्राचीनतम पाठशाला से

शाश्वत सत्य का सबक लेने का-

“मैं” को आग में धधकते और भस्म होते देखा ,

महसूस हुआ एक रिश्ता खो गया,

फिर खुद से मुलाकात हुई ।

समझ आया जब जीवन का यह हश्र होना है,

तब मिथ्या मोह, अहंकार, गुमान, गरूर किस काम का?

 

Image courtesy- Aneesh.

 

 

कोई भी रिश्ता…..

Deep Thoughts

कोई भी रिश्ता ना होने पर भी जो रिश्ता निभाता हैं,

वो रिश्ता एक दिन दिल की गहराइयों को छू जाता है।

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गुमनाम

आज गुमनाम हूँ ,

जरा फासला रख मुझ से।

कल फिर मशहूर हो जाऊँ ,

तब  कोई रिश्ता निकाल लेना।

 

 

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