रात बुला ले जाती है!

चारो ओर छाया रात का रहस्यमय अंधेरा,

दिन के कोलाहल से व्यथित निशा का सन्नाटा,

गवाह है अपने को जलाते चराग़ों के सफ़र का।

कभी ये रातें बुला ले जाती है नींद के आग़ोश में ख़्वाबों के नगर।

कभी ले जातीं है शब-ए-विसाल और

कभी दर्द भरी जुदाई की यादों में ।

हर रात की अपनी दास्ताँ और अफ़साने होतें है,

और कहने वाले कह देतें हैं- रात गई बात गई !

शब-ए-विसाल – मिलन की रातें/ the night of union

#TopicByYourQuote

रो देती है रात

कितने ख़्वाब सजाती है रात।

लोगों के टूटते ख़्वाबों को देख रो देती रात।

कई अफ़साने-ए- इश्क़ बिखरते देख,

टूटे दिलों को, पीते अश्क देख,

रो देती है, अंधेरी से अंधेरी रात।

धोखा देने वालों की चैन की नींद देख,

रश्क से भर रो देती है चाँदनी रात।

हर पत्ते पर शबनम की बूँदें गवाह है

रजनी….रात के आँसुओं के, कि

दूसरों के दर्द से भर रो देती है रात।

TopicByYourQuote

दिल की बातें

अक्सर ज़ुबान पर लगे

सयंम के पहरे स्याह पलों

में बिखर जातें है।

दिल की गहराइयों में

छुपी बातें, लबों पर

बेबाक़ी से छलक आतीं हैं।

दिल से दिल की बातें

करनी हो तो चरागों के

जश्न से बेहतर अँधेरे हैं।

मनोवैज्ञानिक तथ्य– देर रात को बात करने पर ज्यादातर लोग सच बोलते हैं, क्योंकि रात को दिमाग थका हुआ होने के कारण ज्यादा नहीं सोच पाता है।

Psychology says – Night Is The Best Time To Have A Deep Conversation With Someone, According To Experts

दो चाँद

परसों पूर्णिमा की रात,

मानसून से पहले भटकते आ गए बादलों ने

चाँद को ले लिया आग़ोश में।

बादल बरसे, धुल गया गगन  

अौ रात आरसी हो गई ,

और धरा भी आईना।

अब दो चाँद थे,

एक ऊपर एक नीचे।

ज्यों हीं धरा का  चाँद छूने हाथ बढ़ाया,

पानी हिला अौ चाँद  खो गया।

ऐसे ही खो जाते हो तुम भी, हाथ बढ़ाते।

 

 

ज़िंदगी के रंग -211

 

 

 

 

बादलों और धूप को लड़ते देखा ।

रात की ख़ुशबू में,

खुली आँखों और सपनों को झगड़ते देखा।

फ़ूल और झड़ती पंखुड़ियों को,

हवा के झोंकों से ठहरने कहते देखा।

अजीब रुत है।

हर कोई क्यों दूसरे से नाख़ुश है?

आसमान के पन्ने पर !!!

गिनती बन कर रह गए!

श्रम के सैनिक निकल पड़े पैदल, बिना भय के बस एक आस के सहारे – घर पहुँचने के सपने के साथ. ना भोजन, ना पानी, सर पर चिलचिलाती धूप और रात में खुला आसमान और नभ से निहारता चाँद. पर उन अनाम मज़दूरों का क्या जो किसी दुर्घटना के शिकार हो गए. ट्रेन की पटरी पर, रास्ते की गाड़ियों के नीचे? या थकान ने जिनकी साँसें छीन लीं. जो कभी घर नहीं पहुँचें. बस समाचारों में गिनती बन कर रह गए.

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जागता रहा चाँद

जागता रहा चाँद सारी रात साथ हमारे.

पूछा हमने – सोने क्यों नहीं जाते?

कहा उसने- जल्दी हीं ढल जाऊँगा.

अभी तो साथ निभाने दो.

फिर सवाल किया चाँद ने –

क्या तपते, रौशन सूरज के साथ ऐसे नज़रें मिला सकोगी?

अपने दर्द-ए-दिल औ राज बाँट सकोगी?

आधा चाँद ने अपनी आधी औ तिरछी मुस्कान के साथ

शीतल चाँदनी छिटका कर कहा -फ़िक्र ना करो,

रात के हमराही हैं हमदोनों.

कितनों के….कितनी हीं जागती रातों का राज़दार हूँ मैं.

चमगादड़ और चीन- आओ थोड़ा हँस लें !

शाम के धुँधलके में एक बड़ा चमगादड़,

अपने विशाल पंख फैलाए,

इतराता, उड़ता हुआ ऐसे गुज़रा,

जैसे रातों का राजा हो …..

कहा हमने – बच्चू यहाँ हो इसलिए इतरा रहे हो,

चीन में होते तो सूप के प्याले में मिलते …….

पास के पेड़ पर उलटा लटक कर वह हँसा और बोला-

हम भी कुछ कम तो नहीं.

एक झटके में सारी दुनिया  उलट-पलट दी.

अब चमगादड़ का सूप पीनेवालों को

अपनी छोटी-छोटी पैनी आँखों से चिकेन भी चमगादड़ दिखेगा.