जागता रहा चाँद

जागता रहा चाँद सारी रात साथ हमारे.

पूछा हमने – सोने क्यों नहीं जाते?

कहा उसने- जल्दी हीं ढल जाऊँगा.

अभी तो साथ निभाने दो.

फिर सवाल किया चाँद ने –

क्या तपते, रौशन सूरज के साथ ऐसे नज़रें मिला सकोगी?

अपने दर्द-ए-दिल औ राज बाँट सकोगी?

आधा चाँद ने अपनी आधी औ तिरछी मुस्कान के साथ

शीतल चाँदनी छिटका कर कहा -फ़िक्र ना करो,

रात के हमराही हैं हमदोनों.

कितनों के….कितनी हीं जागती रातों का राज़दार हूँ मैं.

प्राचीनतम पाठशाला

एक दिन मौका मिला जीवन के

प्राचीनतम पाठशाला से

शाश्वत सत्य का सबक लेने का-

“मैं” को आग में धधकते और भस्म होते देखा ,

महसूस हुआ एक रिश्ता खो गया,

फिर खुद से मुलाकात हुई ।

समझ आया जब जीवन का यह हश्र होना है,

तब मिथ्या मोह, अहंकार, गुमान, गरूर किस काम का?

 

Image courtesy- Aneesh.