मिट्टी

विचारों के गहरे सागर में अकेले

ङूबते-उतराते  मन में एक ख्याल,

एक प्रश्न आया।

हम सब मिट्टी से उपज़ें हैं,

एक दिन मिट्टी में मिल जायेंगें।

यह जानते हुए भी,

जीवन से मोह इतना गहरा क्यों होते है?

बारिश की बूंदें

सारे इत्रों की खुशबू,आज मन्द पड़ गयी…

मिट्टी में बारिश की बूंदे,जो चन्द पड़ गयी…

Unknown

फूलों की कीमत

 

मिट्टी में दबे बीज को हीं

मालूम होता है,

शाखों पर खिले फूलों की

क्या कीमत चुकाई है उसने……….

चाहत -कविता

गर चाहत हो, ईमानदारी हो,

कमजोर की हिफाजत में भी चीजें  महफूज रह सकती हैं

जैसे मिट्टी के गुल्लक में

 लोहे के सिक्के