शुभ मकर संक्रांति, लोहड़ी व पोंगल! Happy Makar Sankranti, lohadi n Pongal!!

सूर्य दक्षिण जा बैठा और सर्द मौसम ने चादर फैला लिया. अब सूरज उत्तर की यात्रा पर निकला है, कर्क से मकर की ओर. अब रातें छोटी और दिन लम्बी होगी. सूर्य की गुनगुनी धूप में आकाश रंग-बिरंगी पतंगो से जगमगा उठेगा. नदियों-तीर्थों पर उपासक प्रकृति के सम्मान में सूर्य को नमन करेंगे. जीवन नव धान्य, गुड-तिल के माधुर्य से भर जाएगा.

मान्यता है कि काले रंग की साड़ी और मृग चर्म की कंचुकी, नीलम का आभूषण, अर्क पुष्प की माला धारण किए हुए “संक्रांति” आती है, जो सुख सम्पन्नता का प्रतीक है. मानव जीवन के आधार – प्राकृतिक को, कृतज्ञता अर्पित करते इस पावन त्योहार पर आप सबों को हार्दिक शुभकामनाएं!!

भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।
तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये।।
मकरसंक्रांन्तिपर्वणः सर्वेभ्यः शुभाशयाः।

It is not Meditation

 

 

माला तो कर में फिरे, जीभ फिरे मुख माहि |

मनुआ तो चहुं दिश फिरे, यह तो सुमिरन नाहि ||

 

The  rotating  rosary by the hand,

(or) the tongue twisting in the mouth,

With the mind wandering everywhere,

this isn’t meditation (Oh uncouth!).

 

~~ Kabir