फ़िज़ा में !!!

सोन्धी-सोन्धी ख़ुश्बू बिखर गई फ़िज़ा में.

कहीं बादल बरसा था या आँखें किसी की?

कहा था –

ना कुरेदो अतीत की यादों को.

माज़ी…..अतीत के ख़ाक में भी बड़ी आग होती है.

 

अतीत


यादों में,

माज़ी….अतीत में

डूब कर

कभी कभी लगता है,

हम, हम नहीं रहे,

तुम हो गए!!!!!

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Image courtesy – Aneesh