प्राचीनतम पाठशाला

एक दिन मौका मिला जीवन के

प्राचीनतम पाठशाला से

शाश्वत सत्य का सबक लेने का-

“मैं” को आग में धधकते और भस्म होते देखा ,

महसूस हुआ एक रिश्ता खो गया,

फिर खुद से मुलाकात हुई ।

समझ आया जब जीवन का यह हश्र होना है,

तब मिथ्या मोह, अहंकार, गुमान, गरूर किस काम का?

 

Image courtesy- Aneesh.

 

 

जिंदगी के रंग – 40

बातो में खुशबू 

कभी कभी ही महसूस होती है 

जैसे कच्चे  गुलाबे  इत्र  की महक हो फैली हर ओर .

यह हवा के झोंके से बिखरती नहीँ 

कहीँ गहरे दिल में

 खजाने बन जमा हो जाती  हैँ .

यादों के गुलाब बन कर  .