दिनों की गिनती – लॉकङाउन का 50वाँ दिन

जिंदगी के पचास दिन बीत गये….कम हो गये।

बिना कुछ कहे-सुने, चुपके से एक शाम अौर ढल गई।

दिनों की गिनती शायद हीं कभी इतनी शिद्दत से की होगी।

यह भी एक यात्रा है।

मालूम नहीं कितनी लंबी।

कितने सबकों…पाठों के साथ।

 ना शिकवा है ना गिला है।

पर यात्रा जारी है।

आशा भरे  नये दिन, नई सुबह के इंतज़ार के साथ।

 

Image Courtesy- Chandni Sahay

दर्द भरे दिल पर बोझ

दर्द भरे दिल पर पङे बोझ को जब उठाया

उसके तले दबे
बहुत से जाने पहचाने नाम नज़र आये।

जो शायद देखना चाहते थे….
तकलीफ देने से कितना दर्द होता है?

पर वे यह तो भूल गये कि
  चेहरे पर पङा नकाब भी तो सरक उनके असली चेहरे दिखा गया।

इन इत्रों, खुशबू, सुगंध से परे

इन दुनियावी  रंगों , इत्रों, खुशबू, सुगंध से परे

कोई अौर भी राग-रंग,  महक है ,

जो  दिल और आत्मा को रंगती हैं

जीवन यात्रा में।

यह  खुशबू   हमें ले कर  चलती रहती है,

प्यार भरे जीवन के अनन्त  पथ पर।