प्रतिबिंब

ज़िंदगी के अनुभव, दुःख-सुख,

पीड़ा, ख़ुशियाँ व्यर्थ नहीं जातीं हैं.

देखा है हमने.

हाथ के क़लम से कुछ ना भी लिखना हो सफ़ेद काग़ज़ पर.

तब भी,

कभी कभी अनमने हो यूँ हीं पन्ने पर क़लम घसीटते,

बेआकार, बेमतलब सी लकीरें बदल जाती हैं

मन के अंदर से बह निकली स्याही की बूँदों में,

भाव अलंकारों से जड़ी कविता बन.

जिसमें अपना हीं प्रतिबिंब,

अपनी हीं परछाईं झिलमिलाती है.

इंद्रधनुष

बरसात की झड़ी

बादलों का गरजना ,

बरसती बूँदों की झड़ी

से प्यार हो जाता हैं ,

जब नीले आसमान में

छिटके इंद्रधनुष की सतरंगी

छँटा खिड़की तक उतर आती हैं.

धनक दिल और धड़कनों को अपने रंग में रंग जाती है.

 

वर्षा की बूँदों को लिखने की ख़्वाहिश

वर्षा की बूँदों को लिखने की ख़्वाहिश……

आकाश के काले मेघ से टपकते

बारिश की सुरीले संगीत ने

धरती के आँचल पर लिख

अपने आप पूरी कर दी .