ज़िंदगी के रंग – 212

ज़िंदगी में लोंग आते हैं सबक़ बन कर।

फ़र्क़ यह है कि किस का असर कैसा है?

 वे तराश कर जातें या तोड़ कर ?

पर तय है एक बात ,

चोट करने वाले भी टूटा करते हैं।

 हथौडिया छेनियाँ भी टूटा करतीं है।

 

 

 

Image – Aneesh

जिंदगी के रंग – 209

गर गुल ना खिले गुलशन में,

मौसम, मृत्तिका….माटी, बीज  में कमी खोजते हैं सब,

ना कि फूलों में ।

पर अजब बात और ख़यालात है हमारे,

कोई  जिंदगी ठोकर से  खिलने ना पाये,

टूट जाए,

मुरझा जाये।

तब लोग उस में हीं  कमी खोजते हैं.

 

जिंदगी के रंग – 208

दुनिया में होङ लगी है आगे जाने की…

किसी भी तरह सबसे आगे जाने की। 

कोई ना कोई तो आगे होगा हीं।  

हम आज जहाँ हैं,

वहाँ पहले कोई अौर होगा….. उससे भी पहले कोई अौर।

ज़िंदगी सीधी नहीं एक सर्कल में चलती है। 

जैसे यह दुनिया गोल है।

ज़िंदगी का यह अरमान, ख़्वाब  –

सबसे आगे रहने का, सबसे आगे बढ़ने का……

क्या इस होड़ से अच्छा नहीं  है –

सबसे अच्छा करने का।

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Image courtesy- google.

जेलोटोलॉजी या हँसी का विज्ञान

क्या आप जानते हैं, हँसी का मनोविज्ञान या विज्ञान होता है। हँसी के  शरीर पर होने वाले प्रभाव को ‘जेलोटोलॉजी’ कहते हैं।

क्या आपने कभी गौर किया है, हँसी संक्रामक या इनफेक्शंस होती है। एक दूसरे को हँसते देखकर ज्यादा हँसी आती है। बच्चे सबसे अधिक हँसते हैं और महिलाएं पुरुषों से अधिक हँसती हैं। हम सभी बोलने से पहले अपने आप हँसना सीखते हैं। दिलचस्प बात है कि हँसने की भाषा नहीं होती है। हँसी खून के बहाव को बढ़ाती है। हम सब लगभग एक तरह से हँसते हैं।

मजे की बात है कि जब हम हँसते हैं, साथ में गुस्सा नहीं कर सकते । हँसी तनाव कम करती है। हँसी काफी कैलोरी भी जलाती है। हँसी एक अच्छा व्यायाम है। आजकल हँसी थेरेपी, योग और ध्यान द्वारा उपचार भी किया जाता है। डायबिटीज, रक्त प्रवाह, इम्यून सिस्टम, एंग्जायटी, तनाव कम करने, नींद, दिल के उपचार में यह फायदेमंद साबित हुआ हैं। हँसी स्वाभिक तौर पर दर्दनिवारक या पेनकिलर का काम भी करती है।

हमेशा हँसते- हँसाते रहें! खुश रहें! सुरक्षित रहें!

 

 

आदत

इक अजीब सी आदत जाती नहीं.

जब भी परेशां होतें हैं-

तुमसे बातें करने की हसरत जागती हैं।

पर मिलोगे कहाँ?

रास्ता और पता मालूम नहीं.

जीवन के बाद का जीवन

रूमी की पंक्तियों आपको क्या कहतीं हैं? ज़रूर बतायें. आप सबों के विचार मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं.
रूमी को मैंने कुछ साल पहले मायूसी के पलों में, गहराई से पढ़ना शुरू किया था. अब गीता, कबीर, रूमी, नानक और ढेरों संतों की बातों और विचारों में समानता पाया. इनकी पंक्तियाँ मुझे गहरा सुकून देतीं हैं.

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जीवन के बाद के जीवन, को जानने की लालसा इतनी प्रबल है कि ,

मन व आत्मा को हमेशा खींचता है अपनी ओर. 

जीवन के अंत  से  ङरे बिना।

उसमें अब एक लालसा और जुड़ गई है – किसी से मुलाक़ात की.

मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ एक और जहाँ… दुनिया हैं.

भीड़ और परखने वाली नज़रों से दूर…. सही ग़लत से दूर .

What did Rumi mean when he said:

Out beyond ideas of wrongdoing 
and rightdoing there is a field.
I’ll meet you there.

When the soul lies down in that grass
the world is too full to talk about.

Rumi ❤️

 

दिल और आत्मा का दर्द

 

दिलों- दिमाग़ को दर्द जमा करने का कचरादान ना बनाओ.

खुल कर जीने के लिए दर्द को बहने देना ज़रूरी है –

बातों में, लेखन में …..

खुल कर हँसने के लिए खुल कर रोना भी ज़रूरी है,

ताकि दिल और आत्मा का दर्द आँसुओं में बह जाए.

उदाहरण

रोज़ हम लोगों को

उदाहरण देते है .

कभी समझा है यह

कि उदाहरण देना तो सरल है .

उदाहरण बने तो ख़ास बात है !!!!!

अपने आप को

अपने आप को आईने में ढूँढा,

परछाइयों में अक्सों….

चित्रों में खोजा,

लोगों की भीड़ में ,

किसी की आँखों में खोजा,

यादों में, बातों में खोजा,

भूल गई अपने दिल में झाँकना.

जीवन की होड़

जीवन की होड़ में एक बात समझ आई –

हर ओर ….सब लोगों  में योग्यतायें है .

इस दौड़ में शामिल होने

से अच्छा है प्रतिस्पर्धा

अपने आप से रखो ताकि .

सामना बराबर वाले से हो .