खबरें

सब कहते हैं –  प्रकृति  निष्ठुर हो गई है।

पर क़ुदरत से बेरुखी किया हम सब नें ।

कभी सोंचा नहीं यह  क्या कहती है?

 क्यों कहती हैं?

कटते पेङ, मरती नदियाँ आवाज़ें देतीं रहीं। 

जहर बना जल, सागर, गगन। 

हवाएँ कहती रहीं

 अनुकूल बनो या नष्ट हो जाअो…….

अब, पता नही खफ़ा है ? 

 दिल्लगी कर रही है?

या अपने  नियम, कानून, सिद्धांतों पर चल रही है यह ?

खबरें पढ़ कर विचार आता है –

आज हम पढ़तें हैं हङप्पा अौर मोहनजोदाङो,

हजारों साल बाद क्या कोई हमें पढ़ेगा?

 

मानव माइग्रेशन #LockdownIndianMigrants

ग्रेट वाइल्डबीस्ट माइग्रेशन – हर साल अफ्रीका में आश्चर्य जनक दृश्य दिखता है। तंजानिया के सेरेन्गेटी और केन्या के मसाई मारा में भोजन के लिये लाखों जानवरों का महा प्रवास।

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देखा था पशुअों का माइग्रेशन

केन्या, अफ्रिका के जंगलों में।

एक हीं दिशा में,

स्कूल के बच्चों जैसे अनुशासित और अनंत लंबी पंक्तियों में लयबद्ध दौङते,

भागते वाइल्डबीस्ट और ज़ेबरा के झुंङों को।

नदियों मे मगरमच्छों, धरा पर शेरों के शिकार बनते,

मैदान, नदीनाले पार करतेक्रूर मौत से बचतेबचाते।

अौर सुना था…..

 बसंत आने के साथ होता है दुनिया भर में पक्षियों का माइग्रेशन।

पंखों के उड़ान की अद्भुत शक्ति के साथ

अपने घरों को लौटते हैं

  आर्कटिक टर्न पक्षीचमगादड़व्हेल, सामन मछलियां, तितलियाँ पेंगुइन……

 इन विश्व यात्रियों  की महा यात्रा युगों-युगों से

ऋतु परिवर्तन के साथ नियमित चली आ रही है।

यह प्रकृति का विधान है।

लेकिन देखा है पहली बार मानव-माइग्रेशन।

भूखे-प्यासे जलती-तपती धूप में जलते अौ चलते लोग,

अपने घरों की अोर………

क़ैद – पृथ्वी दिवस पर

अफ़सोस क्यों, अगर आज क़ैद में है ज़िंदगी?

जब आज़ाद थे तब तो विचारा नहीं.

अब तो सोंचने-विचारने का समय मिल गया है.

अगर जीवन चाहिये,

तब धरा और प्रकृति का सम्मान करना होगा.

हमें इसकी ज़रूरत है.

यह तो हमारे बिना भी पूर्ण है.

दूसरी दीवाली

पहली बार देखा और सुना साल में दो बार दीवाली!

दुःख, दर्द में बजती ताली.

साफ़ होती गंगा, यमुना, सरस्वती और नादियाँ,

स्वच्छ आकाश, शुद्ध वायु,

दूर दिखतीं बर्फ़ से अच्छादित पर्वत चोटियाँ.

यह क़हर है निर्जीव मक्खन से कोरोना का,

या सबक़ है नाराज़ प्रकृति का?

देखें, यह सबक़ कितने दिन टिकता है नादान, स्वार्थी मानवों के बीच.

Mouse deer species not seen for nearly 30 years is found alive in Vietnam

प्रकृति हमेशा तालमेल बनाये रखने की कोशिश करती है.
बशर्ते, मानव उसे बर्बाद ना करे!

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distinctly two-tone mouse deer that was feared lost to science has been captured on film foraging for food by camera traps set up in a Vietnamese forest. The pictures of the rabbit-sized animal, also known as the silver-backed chevrotain, are the first to be taken in the wild and come nearly 30 years after the last confirmed sighting.

 

News in detail

 

प्रकृति से जुड़ा छठ पूजा

क्या है ऐसा कोई त्योहार जो युगों युगों से प्रकृति-संरक्षण कर रहा है?                                                                                              

आस्था का महापर्व, प्रकृति और मानव के सम्बंधों का पावन त्योहार छठ।                                                                                          

प्रकृति को उसके उपहारों के लिए आभार प्रदर्शन और श्रद्धा देने की है यह अनूठी परम्परा।                                                                                

जल, नदियों, सागर का सम्मान।                                                                                                                                                    

सूर्य और उसकी रोशनी का मोल , चाहे वह उगता सूरज हो या डूबता रवि।                                                                                          

स्वच्छता का संदेश देता त्योहार।                                                                                                                            

ना पुजारी या पंडित की जरूरत, ना सामाजिक भेदभाव ।                                                                            

कठिन तपस्या, आत्म नियंत्रण और निष्ठा का अद्भुत समिश्रण।                                                                                                          

निश्छलता से आशीर्वाद और मनोकामनाओं के पूरा होने की कामना करते असंख्य व्रती।                                                                            

आज प्रकृति संरक्षण की कोशिशों में क्यों नहीं होती इसकी चर्चा?