खबरें

सब कहते हैं –  प्रकृति  निष्ठुर हो गई है।

पर क़ुदरत से बेरुखी किया हम सब नें ।

कभी सोंचा नहीं यह  क्या कहती है?

 क्यों कहती हैं?

कटते पेङ, मरती नदियाँ आवाज़ें देतीं रहीं। 

जहर बना जल, सागर, गगन। 

हवाएँ कहती रहीं

 अनुकूल बनो या नष्ट हो जाअो…….

अब, पता नही खफ़ा है ? 

 दिल्लगी कर रही है?

या अपने  नियम, कानून, सिद्धांतों पर चल रही है यह ?

खबरें पढ़ कर विचार आता है –

आज हम पढ़तें हैं हङप्पा अौर मोहनजोदाङो,

हजारों साल बाद क्या कोई हमें पढ़ेगा?

 

परिवर्तन स्वीकार करें। Don’t resist the changes

दो विचार, दो अलग युग में जिसके अर्थ समान हैं। Two thoughts of two different eras with similar meaning.

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परिवर्तन संसार का नियम है।।

Change is the law of the universe.

गीता, THE GEETA

 

 

 

परिवर्तन स्वीकार करें

जीवन की धारा के साथ चलें, विपरीत नहीं।

 आपको लगता है , जीवन में गलत हो रहा है ?

लेकिन आप कैसे जानते हैं, आपके लिये सही क्या है?

Instead of resisting to changes, surrender.

Let life be with you, not against you.

If you think ‘My life will be upside down’ don’t worry.

How do you know down is not better than upside?

 

– Shams Tabriz ( Rumi’s spiritual Instructor)

अनुगच्छतु प्रवाह !

जीवन प्रवाह में बहते-बहते आ गये यहाँ तक।

 माना,  बहते जाना जरुरी है। 

परिवर्तन जीवन का नियम है।

पर जब धार के विपरीत,

 कुछ गमगीन,  तीखा मोङ आ जाये,

  किनारों अौर चट्टानोँ से टकाराने  लगें, 

  जलप्रवाह, बहते आँसुअों से मटमैला हो चले,

   तब?

 तब भी,

जीवन प्रवाह का अनुसरण करो।

यही है जिंदगी।

प्रवाह के साथ बहते चलो।

 अनुगच्छतु प्रवाह ।।