चिड़ियों की मीटिंग

अहले सुबह नींद खुली मीठी, गूँजती आवाज़ों से.

देखा बाहर परिंदों की सभा है.

शोर मचाते-बतियाते किसी गम्भीर मुद्दे पर, सभी चिंतित थे

– इन इंसानों को हुआ क्या है?

बड़े शांत हैं? नज़र भी नहीं आते?

कहीं यह तूफ़ान के पहले की शांति तो नहीं?

हाल में पिंजरे से आज़ाद हुए हरियल मिट्ठु तोते ने कहा –

ये सब अपने बनाए कंकरीट के पिंजरों में क़ैद है.

शायद हमारी बद्दुआओं का असर है.

जीवन के बाद का जीवन

रूमी की पंक्तियों आपको क्या कहतीं हैं? ज़रूर बतायें. आप सबों के विचार मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं.
रूमी को मैंने कुछ साल पहले मायूसी के पलों में, गहराई से पढ़ना शुरू किया था. अब गीता, कबीर, रूमी, नानक और ढेरों संतों की बातों और विचारों में समानता पाया. इनकी पंक्तियाँ मुझे गहरा सुकून देतीं हैं.

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जीवन के बाद के जीवन, को जानने की लालसा इतनी प्रबल है कि ,

मन व आत्मा को हमेशा खींचता है अपनी ओर. 

जीवन के अंत  से  ङरे बिना।

उसमें अब एक लालसा और जुड़ गई है – किसी से मुलाक़ात की.

मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ एक और जहाँ… दुनिया हैं.

भीड़ और परखने वाली नज़रों से दूर…. सही ग़लत से दूर .

What did Rumi mean when he said:

Out beyond ideas of wrongdoing 
and rightdoing there is a field.
I’ll meet you there.

When the soul lies down in that grass
the world is too full to talk about.

Rumi ❤️

 

दर्द भरे दिल पर बोझ

दर्द भरे दिल पर पङे बोझ को जब उठाया

उसके तले दबे
बहुत से जाने पहचाने नाम नज़र आये।

जो शायद देखना चाहते थे….
तकलीफ देने से कितना दर्द होता है?

पर वे यह तो भूल गये कि
  चेहरे पर पङा नकाब भी तो सरक उनके असली चेहरे दिखा गया।

चेहरे पर चेहरा #मास्क#mask   -कविता 

mask

नकाब , हिजाब , परदे, ओट ,घूंघट , मुखौटे  या मास्क.

कभी  छुपाती  खूबसूरती , कभी बदसूरती 

कभी छुपाती खुशी, कभी ग़म हैं.

कही  फरेब.छुपा होता हैं.

कहीँ  आँसू.

कही दुल्हन का घूंघट , कही धोखे की आहट 

कही धूप -छाँव से ओट.

छउ  नाच या 

सुंदरबन के बाघों को धोखा देते मुखौटे.

                                                     हर जगह चेहरे पर चेहरा   !!!!!!!!

किस  नकाब के  पीछे.
 ना जाने क्या रहस्य छुपा हैं ,

 बंद लिफाफे के  आकर्षण सा .

रहस्यमय मास्क 

 खींचती  हैं हर  नज़र अपनी ओर …..

 

mask 1

 

 

 

 

images from internet.

धुआँ (कविता)

smoke

 

नज़रों के सामने धुन्ध सा
छाया था.
सब कुछ धुआँ धुआँ सा था.
तभी हवा चली , धुंध छ्टी
और देखा , ये तो परछाइयां हैं ,
जिन्हे हम इंसान समझ बैठे.

 

shadow

 

 

images from internet.