दीवाली अौर दीये !

हमने खुद जल कर उजाला किया.

अमावास्या की अँधेरी रातों में,

 बयार से लङ-झगङ कर…

तुम्हारी ख़ुशियों के लिए सोने सी सुनहरी रोशनी से जगमगाते रहे.

और आज उसी माटी में पड़े हैं…..

उसमें शामिल होने के लिए

जहाँ से जन्म लिया था.

यह थी हमारी एक रात की ज़िंदगी.

क्या तुम अपने को जला कर ख़ुशियाँ बिखेर सकते हो?

कुछ पलों में हीं जिंदगी जी सकते हो?

  सीखना है तो यह सीखो। 

 

 

Image courtesy- Aneesh

ज़िंदगी के रंग – 192

जी लो ज़िंदगी, जैसी सामने आती है.

क्योंकि ज़िंदगी कभी वायदे नहीं करती.

इस लिए शिकायतें बेकार है.

और कुछ बातों  हम बदल नहीं सकते.

इसलिए अपने आप से शिकायतें बेकार है.

छोटी-छोटी ख़ुशियों में छिपी हैं बड़ी ख़ुशियाँ ,

छोटी दीवाली से  मना लो बड़ी दिवाली .

शुभ छोटी दीवाली!!!