दीवाली अौर दीये !

हमने खुद जल कर उजाला किया.

अमावास्या की अँधेरी रातों में,

 बयार से लङ-झगङ कर…

तुम्हारी ख़ुशियों के लिए सोने सी सुनहरी रोशनी से जगमगाते रहे.

और आज उसी माटी में पड़े हैं…..

उसमें शामिल होने के लिए

जहाँ से जन्म लिया था.

यह थी हमारी एक रात की ज़िंदगी.

क्या तुम अपने को जला कर ख़ुशियाँ बिखेर सकते हो?

कुछ पलों में हीं जिंदगी जी सकते हो?

  सीखना है तो यह सीखो। 

 

 

Image courtesy- Aneesh

दिवाली में दीये

The REKHA SAHAY Corner!

किसी ने पूछा –

दिवाली में दीये तो जला सकतें हैं ना?

ग्लोबल वार्मिंग की गरमाहट

तो नहीं बढ़ जायेगी……

नन्हा दीया हँस पङा।

अपने दोस्तों को देख बोला –

देखो इन्हें जरा…..

सारी कायनात  अपनी गलतियों से जलाने वाले

हमारी बातें कर रहें हैं।

जैसे सारी गलती हमारी है।

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दिवाली में दीये

किसी ने पूछा –

दिवाली में दीये तो जला सकतें हैं ना?

ग्लोबल वार्मिंग की गरमाहट

तो नहीं बढ़ जायेगी……

नन्हा दीया हँस पङा।

अपने दोस्तों को देख बोला –

देखो इन्हें जरा…..

सारी कायनात  अपनी गलतियों से जलाने वाले

हमारी बातें कर रहें हैं।

जैसे सारी गलती हमारी है।