शुभ देव दिवाली – कार्तिक पूर्णिमा

शुभ कार्तिक पूर्णिमा !!

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कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली या देव दिवाली कहा जाता है. कार्तिक पूर्णिमा का  त्योहार दीपावली के 15 दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन माता गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन काशी  के सभी गंगा घाटों को दीयों की रोशनी से  रौशन किया जाता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है.

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।

महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद आज के दिन पांडवों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए स्नान कर दीपदान करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की थी.

सिख सम्प्रदाय में कार्तिक पूर्णिमा का दिन प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था।

कहते है, कार्तिक पूर्णिमा को गोलोक के रासमण्डल में श्री कृष्ण ने श्री राधा का पूजन किया था।

मान्यता है कि, कार्तिक पूर्णिमा को ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किया था।

 

Image courtesy- Aneesh

प्राचीनतम पाठशाला

एक दिन मौका मिला जीवन के

प्राचीनतम पाठशाला से

शाश्वत सत्य का सबक लेने का-

“मैं” को आग में धधकते और भस्म होते देखा ,

महसूस हुआ एक रिश्ता खो गया,

फिर खुद से मुलाकात हुई ।

समझ आया जब जीवन का यह हश्र होना है,

तब मिथ्या मोह, अहंकार, गुमान, गरूर किस काम का?

 

Image courtesy- Aneesh.

 

 

महाकाल

एक दिन देखा शिव का चिता, भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से ।

समझ नहीं आया इतना डर क्यों वहां से जहां से यह भभूत आता हैं।

कहते हैं, श्मशान से चिता भस्म लाने की परम्परा थी।

पूरी सृष्टि इसी राख  में परिवर्तित होनी है एक दिन।

एक दिन यह संपूर्ण सृष्टि शिवजी में विलीन होनी है।

वहीं अंत है, जहां शिव बसते हैं।

शायद यही याद दिलाने के लिए शिव सदैव सृष्टि सार,

इसी भस्म को धारण किए रहते हैं।

फिर इस ख़ाक … राख के उद्गम, श्मशान से इतना भय क्यों?

कोलाहल भरी जिंदगी से ज्यादा चैन और शांति तो वहां है।

 

 

भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से – वहाँ उपस्थित होने पर भी यह  पूजन देखा महिलाओं के लिए वर्जित है.

चाँद मिला राहों में….

एक दिन, चाँद मिला राहों में.

पूछा उसने – इतनी रात में अकेले ?

तुम्हें अँधेरे से डर नहीं लगता क्या ?

जवाब दिया हमनें – तुम भी तो अकेले हो,

स्याह रातों में…..

तुमसे हीं तो सीखा है,

अँधेरे में भी हौसले से अकेले रहना.

दिन

अपना आज का दिन बनाने के लिए अक्सर

गुजरे दिन की शामें याद कर लेते हैं।

प्रतिपदा का चाँद

प्रतिपदा का कमज़ोर, क्षीण चाँद

थका हारा सा अपनी

पीली अल्प सी चाँदनी ,

पलाश के आग जैसे  लाल फूलों पर

बिखेरता हुआ बोला –

बस कुछ दिनो की बात है .

मैं फिर पूर्ण  हो जाऊँगा।

मेरी चाँदी सी चाँदनी हर अोर बिखरी होगी .

 

प्रतिपदा – पक्ष की पहली तिथि।

Happy Dhanteras!! शुभ धनतेरस !!

मान्यता है कि धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरि का जन्म  हुआ था।

सागर मंथन से धनवंतरि हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश लेकर प्रकट हुए थे।

 धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और मृत्युदेव यमराज की पूजा की जाती है।

 

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