आग का दरिया

नासमझी…नादानी क्या बया करे समझदारों की?

जंगल…धरा तो जल हीं रहें हैं.

दुनिया ने तरक़्क़ी इतनी कर ली नदी …पानी पर भी आग लगा दी.

अपने घर में आग लगे, दो पल भी बर्दाश्त नहीं.

बेज़ुबान जलचरों का घर- नदियाँ जलती रहें, चिंता नहीं.

यह समझदारी समझ नहीं आती.

Assam river burns for two days after crude oil spillage

https://www.google.co.in/amp/s/www.thehindu.com/news/national/other-states/assam-river-on-fire-for-two-days-after-crude-oil-spillage/article30724994.ece/amp/

जिंदगी के रंग -17

 

हसरतों -अरमानों को पूरी करने की उम्र में, जब जिंदगी सबक सिखाने लगे,

तब समझ लो जिंदगी रंग दिखाने लगी है,  तुम्हें दरिया  सा गहरा बनाने लगी है।