शैडो पैंडमिक

The shadow pandemic: महिलाओं, बच्चों और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, Violence against women and girls.

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 कोरोना महामारी में अनेकों  देशों के  लोग लॉकडाउन में घरों में बंद हैं। ऐसे में एक और घातक खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है। इस दौरान लड़कियों  अौर महिलाओं के खिलाफ घरेलू  हिंसा बढ़ गये हैं। जिससे दुनिया भर में  घरेलू हिंसा हेल्पलाइन और शेल्टरों में मदद के लिए कॉल बढ़ गए हैं।

भारत में राष्ट्रीय महिला आयोग  ने  भी घर पर दुर्व्यवहार का रिपोर्ट करने वाली महिलाओं और बच्चों की संख्या बढ़ने की  रिपोर्ट की है। हम सभी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि  दुर्व्यवहार की वास्तविक  संख्या, रिपोर्ट  किये  संख्या से बहुत अधिक होगी। हमारे देश भारत में, हमारी  एक बड़ी  आबादी कोरोना के वजह से आजीविका से वंचित हो गई है।  ऐसे  में  महिलाओं अौर बच्चों के साथ  हिंसा वृद्धि  दुःखद है।  यह समझने की जरुरत है कि इन सब का सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक  परिणाम कितना भयंकर होगा। 

 

 

आज – २२ मार्च, जनता कर्फ़्यू

आज सुबह बॉलकोनी में बैठ कर चिड़ियों की मीठा कलरव सुनाई दिया

आस-पास शोर कोलाहल नहीं.

यह खो जाता था हर दिन हम सब के बनाए शोर में.

आसमान कुछ ज़्यादा नील लगा .

धुआँ-धूल के मटमैलापन से मुक्त .

हवा- फ़िज़ा हल्की और सुहावनी लगी. पेट्रोल-डीज़ल के गंध से आजाद.

दुनिया बड़ी बदली-बदली सहज-सुहावनी, स्वाभाविक लगी.

बड़ी तेज़ी से तरक़्क़ी करने और आगे बढ़ने का बड़ा मोल चुका रहें हैं हम सब,

यह समझ  आया.