तन्हाई

चाँद झुका,

खुले वातायन से

झाँक मुस्कुराया।

बोला, हमें लगता था

हम हीं अकेले दमकते हैं।

यहाँ तो और भी है,

कोई तनहा, तन्हाई

में मुस्कुरा रहा है।

तन्हाई से मुलाकात

तन्हाई से मुलाकात हुई,

उसने अपनी भीगी पलकों को खोली,

…..बोली

मैं भी अकेली …..

क्या हम साथ  समय

बिता सकते हैं?

हम नें कहा – हाँ जरुर …..

अकेलेपन अौर पीङा से

गुजर कर हीं कला निखरती है।