साँस के साथ बुनी गई ज़िंदगी!

साँस के साथ बुनी गई जो ज़िंदगी,

वह अस्तित्व खो गया क्षितिज के चक्रव्यूह में.

अब अक्सर क्षितिज के दर्पण में

किसी का चेहरा ढूँढते-ढूँढते रात हो जाती है.

और टिमटिमाते सितारों के साथ फिर वही खोज शुरू हो जाती है –

अपने सितारे की खोज!!!!

Image courtesy- Aneesh    

 

चुम्बक magnet

 

पल पल बदलता यह मन

ना जाने क्या ढूँढता रहता है .

शायद यह खींचता  है कुछ

अौर ख़ुद खींच जाता  है किसी ओर।

चुम्बक की तरह लगता है ….