जिंदगी के रंग – 209

गर गुल ना खिले गुलशन में,

मौसम, मृत्तिका….माटी, बीज  में कमी खोजते हैं सब,

ना कि फूलों में ।

पर अजब बात और ख़यालात है हमारे,

कोई  जिंदगी ठोकर से  खिलने ना पाये,

टूट जाए,

मुरझा जाये।

तब लोग उस में हीं  कमी खोजते हैं.

 

ठोकर

वक्त ने गुजरते-गुजरते

पलट कर पूछा –

जब भी होते हो खुश या दुखी ,

कहते हो – यह वक्त गुजर जायेगा।

फिर मेरे गुजरने पर याद क्यों करते हो?

हमने कहा, क्योंकि

तुम्हारी ठोकरों ने  हमें तराशा है………………