गारंटी

कुछ पक्के मकान सैलाबों में डूब जाते है।

दृढ़ निश्चय दुनियादारी में छूट जाते हैं।

गहरे नाते समय के चोट से अक्सर टूट जातें हैं।

पुष्ट तरु झँनझावत से टूट जातें है।

अटल-अचल टाईटैटिक़

तूफ़ानी लहरों में डूब जातें हैं।

कुछ भी गारंटी नहीं इस दुनिया में ।

फिर भी हसरतें-ख्वाहिशें रोज़

जवान होतीं रहतीं है?

गुमान

गुमान में डूबे आसमान में

आफ़ताब के साथ

सितारों को दमकते देखा है .

लेकिन

फलक से टूट सितारों को

गर्दिशों में मिलते भी देखा है.

जिंदगी के रंग – 209

गर गुल ना खिले गुलशन में,

मौसम, मृत्तिका….माटी, बीज  में कमी खोजते हैं सब,

ना कि फूलों में ।

पर अजब बात और ख़यालात है हमारे,

कोई  जिंदगी ठोकर से  खिलने ना पाये,

टूट जाए,

मुरझा जाये।

तब लोग उस में हीं  कमी खोजते हैं.

 

काँच की नगरी

टूट कर मुहब्बत करो

या मुहब्बत करके टूटो.

यादों और ख़्वाबों के बीच तकरार चलता रहेगा.

रात और दिन का क़रार बिखरता रहेगा.

कभी आँसू कभी मुस्कुराहट का बाज़ार सजता रहेगा.

यह शीशे… काँच की नगरी है.

टूटना – बिखरना, चुभना तो लगा हीं रहेगा.