सोंच विचार है ज़रूरी

सोंच विचार है ज़रूरी ।
क्यों बार-बार माफ़ करते हैं
दर्द देने वालों को?
खोने के डर से?
किसी को पाने की कोशिश में?
तब ज़िंदगी में दर्द और तकलीफ़ मिलेगी

और खोना होगा अपने आप को।
कठिन है लोगों को बदला।
आसान है आसपास के लोगों को बदलना।

Psychological fact – Human wants

bond for love and support. Sometimes

we bond with people who are mentally

and/or physically not good for us/ abuse us.

Trauma bond is bad for our mental health.

फिर याद आए वो

फिर याद आए वो,

तो ग़मगीन हो जाते हो।

चाह कर भी भूल ना पाए

तो ग़मगीन हो जाते हो।

कभी दुआओं में किसी को माँगते हो।
कभी उसे हीं भूलने की दुआएँ माँगतें हो।

झाँसी की रानी – लक्ष्मी बाई

चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

सुभद्राकुमारी चौहान

Lakshmi Bai / Laxmi Bai, birth date

November 19, 1835, Kashi, India.

इश्क़ है जागती रातें

इश्क़ है जागती रातें, उनींदी आँखें, गुनगुनाते गीत।

मुहब्बत है ख़्वाब, सितारे, चिराग़, चाँद

अँधेरी रातें, अधूरा चाँद, अधूरे किस्से।

इस इश्क़ को हीं कहते हैं बंदगी।

हम तो जी रहे हैं यही ज़िन्दगी।

तुम एक बार में लगे टूटने?

हँस कर पूछा चाँद ने।

कदर

नहीं थी उनको हमारी कदर,

जिसके हम थे सबसे बड़े कदरदान।

हमारी कदर नहीं थी उनको,

जिसके हम सबसे बड़े कदरदान थे।

रात के आख़री किनारे पर

इक तन्हा चराग़, कमजोर पड़ते लौ से

निशा के गहरे अँधेरे से लड़ता थक सा गया।

रात के आख़री किनारे पर

टिमटिमाते चराग़ के कानों में,

सहर का सितारा बोल पड़ा –

हौसला रख, सुबह के दीप।

कुछ हीं पल में अँधेरा जाने वाला है।

रौशन जहाँ करने,

आफ़ताब आने हीं वाला है,

परफ़ेक्ट

किसी से मिलते हीं

उसे ना नापो तौलो,

जज ना करो।

सभी किसी ना किसी रूप में पूर्ण हैं

और अपूर्ण भी।

इंसान रूप में ईश्वर ने अवतार लिया,

यही समझाने के लिए,

कि कोई परफ़ेक्ट नहीं।

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है!

खोने का डर क्यों? साथ क्या लाए थे।

क्या कभी बिना डरे जीने कोशिश की?

तब तो फ़र्क़ समझ आएगा।

इस जहाँ में आए, सब यहाँ पाए।

सब यही छोड़ जायें।

यही कहती है ज़िंदगी।

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है।

एक बार ज़िंदगी की बातें मान

कर देखने में हर्ज हीं क्या है?

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