तहरीर

तहरीर

कभी ज़िंदगी की हर

लहर डराती थीं।

लगता था बहा ले जाएँगी

अपनी रवानी में।

एक दिन दरिया

कानों में फुसफुसाया –

मैं तो दरिया हूँ ।

कभी कभी ज़िंदगी

समुंदर लगेगी।

पर डरो नहीं।

ज़िंदगी की तहरीरों….

लिखावट को पढ़ना सीखो लो।

समय पर, अपने आप पर

भरोसा करना सीख लो।

अपने आप से प्यार

करना सीख लो।

मज़बूत बनाना सीख लो।

हर दरिया समुंदर में गिरता है,

सागर दरिया में नहीं।

दरिया की बातें सुन,

ज़िंदगी की दरिया में

तैरना सीख रहें हैं।

अब गोते लगा कर डूबते

नहीं, उभर जातें हैं ।

अब लोग परेशान है –

यह अक्स किस का है?

क्यों इतनी रौशनी है

पानी में ….

इनकी ज़िंदगानी में।

इम्तहान

इम्तिहान

ज़िंदगी क्या तुझे

ख़बर है?

कितनी बार टूट कर

यहाँ पहुँचें है?

तू बस परखते रह,

नए-नए इम्तिहान

लेती जा।

ज़िंदगी की राहें

ज़िंदगी की राहें

मज़बूत दिखने वालों

की सच्चाई यह होती है,

कि वे कई बार टूट

कर बने होते हैं।

ज़िंदगी की राहों पर,

वे अकेला चलना

सीख चुके होतें हैं।

कोर्स

कोर्स

ना प्यार सीखने का

कोर्स होता है ।

ना दर्द देने या

नफ़रत करने का।

यह तो ज़िंदगी सीखती है,

और दिल सीखता है।

सितारे

गीली पलकों पर

आँसुओं के चमकते

सितारे देख

आसमान के टिमटिमाते

सितारों ने झुक कर पूछा –

क्या जमीं पर नयनों से

सितारे बोना है?

क्यों है, मायूस चेहरा

और आँखों में आँसू ?

इनसे कुछ मिलेगा क्या?

नहीं ना?

अब ज़रा मुस्कुरा कर जी लो।

मान कर जियो कि

तुम्हारे पास मुस्कुरा कर

जीने के अलावा रास्ता नहीं।

फिर देखो,

ज़िंदगी, अँधेरा दूर कर

कैसे जलाती हैं

ख़ुशियों के चिराग़ ।

असली मुस्कुराहटें

ना छुपो अपने आप से,

ना दुनिया से

अपने आप की छुपाओ।

ना ढलो अपने को

बीते कल में…..

या किसी परिभाषा में।

ना रोज़ रोज़ बदलो,

रंग बदलती

दुनिया की तरह।

वरना तुम्हारी असली

मुस्कुराहटें कहीं खो जाएगी।

कभी-कभी It’s ok, not to be ok

कभी कभी ठीक नहीं

होना भी ठीक है।

ज़िंदगी में किसी को खो कर,

या किसी के कड़वाहटों से

कभी कभी मुस्कान

खो देना भी ठीक है।

कभी कभी धोखा खा कर

फिर से भरोसा

ना करना भी ठीक है।

अपनी हर भावना को

जैसे हैं, वैसे हीं

मान लेना ठीक है।

पहेली सी इस ज़िंदगी में,

बस अपने आप पर

भरोसा रखना ठीक है।

टूटने के बजाय हौसला से

आगे बढ़ना ठीक है।

क्योंकि उड़ान भरने

के लिए आसमाँ

और भी है।

मास्टरपीस

मुझ में किसी और

की ना खोज हो।

तुम में किसी

और की ना तलाश हो।

हम हम रहें,

तुम तुम रहो।

दूसरों की ज़िंदगी में अपनी

जगह ना बनाने की

कोशिश हो।

दूसरों को अपनी ज़िंदगी में

समाने की कोशिश ना हो।

किसी के साँचे में ना ढलो।

ना किसी और को

अपने साँचे में ढालो।

तुम तुम रहो, हम हम रहें,

ऊपर वाले ने कुछ

सोंच कर

हीं जतन से हर

मास्टरपीस बनाई होगी।

पल-पल

अभी का पल,

अगले पल मृत हो,

यादें बन जाता है।

इसलिए मनपसंद तरीक़े से,

मनपसंद लोगों के साथ

पल-समय बिताओ।

ताकि हर पल

मीठी और सुनहरी

यादों का ख़ज़ाना

बन जाए।

ज़िंदगी के जंग

ज़िंदगी के जंग में

कुछ लोग टूटते नहीं।

क्योंकि, वे कई बार

टूट टूट कर बने होते हैं।

वे अपने खंडित अस्तित्व में

सुकून खोज़ लेते हैं।

अपनी आँखों की चमक

और मुस्कान में ख़ुशियाँ

ढूँढ लेतें हैं।

ज़िंदगी की थकान में

अपनी रौशनी बनाए रखना

सीख लेते हैं।

चोट के निशानों में

निखारना सीख लेते है।