ज़िंदगी की किताब !!

ज़िंदगी के किताब को ना अपनी मर्ज़ी से बंद कर सकते हैं

ना आगे के सफ़ेद पन्नों को पढ़ सकते हैं।

सिर्फ़ आज़ के पन्नों से कभी कभी दिल भर जाता है!

और जाने- अनजाने अक्सर पुराने पन्ने पलट जातें हैं।

वहाँ होते हो तुम!

अज़ीज़ हो तुम,

पर नाराज़ है हम।

 बिना कहे तुम्हारे जाने से।

प्रार्थना

आँखें बंद कर हाथ जुड़ गए,

ऊपर वाले के सामने।

प्रार्थना करते हुए मुँह से निकला –

विधाता ! तुम दाता हो।

तुमसे प्रार्थना है –

जिसने मुझे जो, जितना दिया।

तुम उसे वह दुगना दो!

यह सुन ना जाने क्यों कुछ लोग नाराज़ हो गए।

 

नज़रिया

उन्मुक्त हवा-बयार बंधन में नहीं बँध सकती है।

दरिया में जहाज़ चलना हो,

तो मस्तूल या पाल को साधना होता है।

ख़ुशियाँ चाहिए तब,

नज़र आती दुनिया को नहीं

अपने नज़रिए को साधना होता है।

 

जिंदगी के रंग – 216

जीवन एक यात्रा है, हम सब मुसाफिर हैं।

चलते जाना है।

किसकी मंजिल मालूम नहीं कहां है।

मिलना एक इत्तेफाक है।

जाने जिंदगी के किस मोड़ पर कब कौन मिल जाए

और कब कहां बिछड़ जाए।

ना जाने कब कोई सफर अधूरा छोड़ चला जाए।

इस धूप- छाँव से सफर में

जब मरहम लगाने वाला अपना सा कोई मिल जाता है।

तब दोस्तों का एक कारवां बन जाता है।

कुछ लोगों से मिलकर लगता है,

जैसे वे जाने पहचाने हैं।

जिंदगी का सफर है इस में चलते जाना।

 मिलना बिछड़ना तो लगा ही रहेगा।

जीवन एक यात्रा है, हम सब मुसाफिर हैं।

बस चलते जाना है।

 

 

यह कविता आदरणीय मनोरमा जी अौर  अनिल जी को समर्पित है. जो किसी कारणवश दूसरे शहर में शिफ्ट हो रहे हैं.

This poem is dedicated to respected  Anil ji and Manorama ji on their farewell. 

जिंदगी के रंग – 209

गर गुल ना खिले गुलशन में,

मौसम, मृत्तिका….माटी, बीज  में कमी खोजते हैं सब,

ना कि फूलों में ।

पर अजब बात और ख़यालात है हमारे,

कोई  जिंदगी ठोकर से  खिलने ना पाये,

टूट जाए,

मुरझा जाये।

तब लोग उस में हीं  कमी खोजते हैं.

 

जिंदगी के रंग -204

जीवन है इसलिए परेशनियाँ हैं.

जीवन का अर्थ है सीखना अौर आगे बढ़ना ।

हम सजीव हैं, इसलिए चुनौतियाँ हैं.

बदलते रहते जीवन की चुनौती है हर पल में हौसला बनाये रखना।

हम हैं, क्योंकि अपनों ने हमें ऐसा बनाया.

अतः जीवन सार है अौरों की मदद करना।

दुःख है, इसलिए ख़ुशियों का मोल है.

जीवन का रहस्य है खुश रहना।

प्यार है इसलिए जीवन का अस्तित्व है.

अतः जीवन का सौंदर्य प्रेम है।

जिंदगी के रंग – 203

जिंदगी में हर रिश्ते एक दूसरे से

मुकाबला,आज़माइशें या

बराबरी करने के लिये नहीं होते हैं।

कुछ रिश्ते एक- दूसरे के हौसले इज़ाफ़ा करने अौर

कमियों को पूरा करने के लिये भी होते हैं।।

तभी ये रिश्तों को दरख्तों के जड़ों की तरह थामे रखते हैं।

जिंदगी के रंग- 193

हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।

कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।

हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।

क्या हम आजाद हैं?

या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?

 

 

जिंदगी के रंग- 189

जब जिंदगी से कोई आजाद होता है,

किसी और को यादों की कैद दे जाता है.

सीखना चाह रहे हैं कैद में रहकर आजाद होना।

काँच के चश्मे में कैद आँखों के आँसू ..अश्कों की तरह.

जिंदगी के रंग-188

अपने हों, हवा-ए-फिजा, उड़ता धुँआ या धुंध हो।

जिनके रुख का पता हीं ना हो ,

उन्हें परखने की कोशिश बेकार है ।

क्यों नहीं आज़माना  है, 

तब्सिरा….. समिक्षा करनी है अपनी? 

ईमानदारी से झाँकों अपने अंदर,

या मेरे अंदर…… .आईने ने कहा।

सारे जवाब मिल जायेंगें।