जिंदगी के रंग- 193

हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।

कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।

हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।

क्या हम आजाद हैं?

या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?

 

 

जिंदगी के रंग- 189

जब जिंदगी से कोई आजाद होता है,

किसी और को यादों की कैद दे जाता है.

सीखना चाह रहे हैं कैद में रहकर आजाद होना।

काँच के चश्मे में कैद आँखों के आँसू ..अश्कों की तरह.

जिंदगी के रंग-188

अपने हों, हवा-ए-फिजा, उड़ता धुँआ या धुंध हो।

जिनके रुख का पता हीं ना हो ,

उन्हें परखने की कोशिश बेकार है ।

क्यों नहीं आज़माना  है, 

तब्सिरा….. समिक्षा करनी है अपनी? 

ईमानदारी से झाँकों अपने अंदर,

या मेरे अंदर…… .आईने ने कहा।

सारे जवाब मिल जायेंगें।

ज़िंदगी के रंग -155

The pleasure that is in sorrow is sweeter than the pleasure of pleasure itself.
~~Percy Bysshe Shelley

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 एक बंद दरवाजे को दस्तक देते ,

अंधेरें, एकांत में बैठ,

जीवन को मनन करते

कुछ हंसी कुछ दर्द

कुछ मधुर कुछ दुखद गीत

बन जाती है अनश्वर य़ादें

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ज़िंदगी के रंग – 149

बिगड़ी बातों को बनाना ,

नाराज़गी को संभालना,

तभी होता हैं जब

बिगाड़ने या नाराज़ होने वाला चाहे .

यह छोटी पर गूढ़ बात

बड़ी देर से समझ आई….

कि एक हाथ से ताली नहीं बजती.

जिंदगी के रंग -117

मेरे ख्याल में दिल की सच्ची अभिव्यक्ति ही सही लेखन है। यह कविता किसी ब्लॉगर द्वारा की गई सराहना का परिणाम है- Aapki kavitayein bahot hi achi lagti hai hamein!!

The secret of good writing is telling the truth. – Gordon Lish

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कुछ जिंदगी की हकीकत, कुछ सपने,

थोङी कल्पनाअों के ताने-बाने

जब शब्दों में ढल कर

अंगुलियों से टपकते हैं पन्ने पर।

तब बनती हैं कविता।

जो अंधेरा हो ना हो फिर चांद अौर बिखरी चाँदनीं दिखाती हैं।

जो लिखे शब्दों से दिल में सच्चा एहसास जगाती हैं।

ऐसे जन्म लेती हैं कविताएँ -कहानियाँ।

 

ज़िंदगी के रंग -114

दर्द ने बताया

समंदर बाहर हो या

दिल अौ आँखों के अंदर .

दोंनो खारे होते हैं.