दर्द और चुभन

दर्द और चुभन कम

करने के लिए,

बार बार चुभनेवाली कील

ज़िंदगी से हटा देनी चाहिए।

अपने लिए जीना,

खुश रहना स्वार्थ नहीं

समझदारी है।

सच्ची बात यह है कि

जो स्वयं खुश हैं।

वही दुनिया में

ख़ुशियाँ बाटें सकतें है।

दीया

दीया

हर दीया की होती है,

अपनी कहानी।

कभी जलता है दीवाली में,

कभी दहलीज़ पर है जलता,

गुजरे हुए की याद का दीया

या चराग़ हो महफ़िल का

या हो मंदिर का।

हवा का हर झोंका डराता है, काँपते लहराते एक रात जलना और ख़त्म हो जाना,

है इनकी ज़िंदगी।

फिर भी रोशन कर जाते है जहाँ।

ज़िंदगी का आईना

ज़िंदगी वह आईना है,

जिसमें अक्स

पल पल बदलता है।

इसलिए वही करो

जो देख सको। 

ज़िंदगी के रंग- 219

ज़िंदगी के समंदर में उठते तूफ़ानों के मंजर ने कहा ।

ना भागो, ना डरो हम से।

हम जल्द हीं गुजर जाएग़ें।

साथ लें जाएँगे कई मुखौटे।

तब तुम याद करोगी,

 हमने अपने झोकों से कितने नक़ाब हटाए।

कितने नक़ली अपनों औ असली अपनों से तुम्हें भेंट कराए।

 शांति अच्छी है ज़िंदगी की……

लेकिन वह नहीं दिखती जो

हम कुछ हीं पलों में दिखा अौर सीखा जातें है।

तुम्हें मज़बूत बना जातें हैं।

तुम्हारे जीवन से बहुत कुछ बुहाड़ कर साफ़ कर जातें हैं।

कुछ पलों की हमारी जिंदगानी, जीवन भर का सीख दे जाती हैं।

ना डरों हमसे, ना डरो तूफ़ानों से।

नज़रिया

उन्मुक्त हवा-बयार बंधन में नहीं बँध सकती है।

दरिया में जहाज़ चलना हो,

तो मस्तूल या पाल को साधना होता है।

ख़ुशियाँ चाहिए तब,

नज़र आती दुनिया को नहीं

अपने नज़रिए को साधना होता है।

 

साँस

हर साँस के साथ ज़िंदगी कम होती है.

फिर भी क्यों ख़्वाहिशें अौर हसरतें कम नहीं होतीं?

 

ज़िन्दगी के रंग – 213

जो बनते रहें हैं अपने.

कहते हैं पहचान नहीं पाए तुम्हें !

आँखों पर गुमान की पट्टी ऐसी हीं होती है.

अच्छा है अगर लोंग पहले पहचान लें  ख़ुद को।

ज़िंदगी के राहों में,

हम ने बख़ूबी पहचान लिया इन्हें!

 

ज़िंदगी के रंग – 212

ज़िंदगी में लोंग आते हैं सबक़ बन कर।

फ़र्क़ यह है कि किस का असर कैसा है?

 वे तराश कर जातें या तोड़ कर ?

पर तय है एक बात ,

चोट करने वाले भी टूटा करते हैं।

 हथौडिया छेनियाँ भी टूटा करतीं है।

 

 

 

Image – Aneesh

ख़्वाब में थोड़ी ज़िंदगी

 

गर नींद  आए  तब सो लेते हैं हम।

ख़्वाब में थोड़ी ज़िंदगी जी लेते  हैं हम।