नीलकंठ

जंग लगी कुंजियों से

रिश्तों के सुप्त तालों को

खोलने की कोशिश में

ना जाने कितने नील गरल

निकलते हैं इस सागर से.

इन नील पड़े चोट के निशान

दिखती नही है दुनिया को,

शिव के नीलकंठ की तरह.

पर पीड़ा….दर्द बहुत देती हैं.

शुजाअत

अक्सर ज़िंदगी के बहाव में,

हर दो राहे पर ख़ुद से ख़ुद जंग लड़नी पड़ती है.

शुजाअत….इसमें हीं है कि

बिना हारे अपनी सही राह पर बहते रहें…चलते रहें।

अगर मंज़िल पाना है.

अर्थ उर्दू लफ्ज़ का –

शुजाअत….वीरता

ज़िंदगी के रंग- 87

ज़िंदगी में जंग

और ज़िंदगी से जंग

चलती रहती है.

अगर लड़ाई जारी रखो बिना डरे……

कोई साथ दे या ना दे तब भी ….

जीत मिल ही जाती है.

 

 

जंग

 

कहते है अपनों से हुए जंग हार जाना चाहिये,

पर बार-बार  हारते हुए,

सामने वालो को भूल का एहसास ना दिलाने 

अौर बस  ढोते रहने से,

 रिश्तों मे जो जंग लग जाती है

उसका क्या?

जिंदगी के रंग 24 – जंग

 

जंग अक्सर अपनों अौर करीबियों से लङी जाती हैं

महाभारत की कहानी में सुना था,

यही सच भी है……….

अब जिंदगी  के चक्रव्यूह से  जाना भी है ।