नीलकंठ

जंग लगी कुंजियों से

रिश्तों के सुप्त तालों को

खोलने की कोशिश में

ना जाने कितने नील गरल

निकलते हैं इस सागर से.

इन नील पड़े चोट के निशान

दिखती नही है दुनिया को,

शिव के नीलकंठ की तरह.

पर पीड़ा….दर्द बहुत देती हैं.

चोट का दर्द

कहते हैं चोट का दर्द टीसता है

सर्द मौसम में.

पर सच यह है कि

सर्द मौसम की गुनगुनी धूप,

बरसाती सूरज की लुकाछिपी की गरमाहट

या जेठ की तपती गर्मी ओढ़ने पर भी

कुछ दर्द बेचैन कर जाती हैं.

दर्द को लफ़्ज़ों में ढाल कर

कभी कभी ही राहत मिलती है.

चोट के निशान

मन अौर दिल पर लगे,

हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर

ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..

जीवन के हर सबक, पीड़ा  अौर आघात के लिये

ये तमगे हैं, जिन्हों ने जीना सीखाया।

इत्रे गुलाब

मुट्ठी में दबे,

मसले – कुचले गुलाबों 

की खुशबू फ़िजा में तैर गई।

हथेलियाँ इत्रे गुलाब अर्क

से भर गईं

क्या हम ऐसे बन सकते हैं? 

मर्म पर लगी चोट 

पीङा नहीं सुगंध  दे ???

जिंदगी के रंग -33

दिल पर लगी चोट,

आँसू बन कर बह जाते हैं।

सूखी आँखें अौर

वर्षा के बाद के

धुले असमान देख कर क्या लगता है ,

कभी इतनी तेज़ आँधी आई थी?

चोट के निशान Scars

मन अौर दिल पर लगे,

हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर

ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..

जीवन के सभी सबक, पीड़ा  अौर आघात 

वे तमगे अौर पदक हैं,

जिन्हों ने जीना सिखाया।