फीकी चाय

ना है  चाँद-सितारे तोड़ लाने की फ़रमाइश।

ना हीरे-मोती, गहने, पाजेब चाहिेए। 

नहीं चाहिये गुलाब, कमल, गेंदे या अमलतास।

वापस आ सकोगे क्या?

अकेले चाय पीते-पीते दिल उब सा गया है।

बस एक कप फीकी चाय का साथ चाहिए ।

एक कप चाय!!

कभी,

चाय पीने की आदत नहीं थी हमारी.

मालूम हीं नहीं चला

कब चाय आदत में शुमार हो गई.

और चाय का मतलब तुम हो गये.