जिंदगी के रंग -205

जीवन में खुश रहने और  सार्थकता ढूंढने में क्या अंतर हैं? 

क्या दोनों साथ-साथ चल सकतें हैं? 

अर्थपूर्णता…सार्थकता के खोज  में अतीत, वर्तमान और भविष्य शामिल होतें हैं।

इसके लिये सही-गलत सीखना पङता है

 खुशियों  के लिये कोई समय, सही-गलत,  कोई शर्त नही होती।

खुशियाँ अपने अंदर होतौं हैं, किसी से मांगनी नहीं पङती है।

सार्थकता जुड़ा है – कर्तव्य,  नैतिकता से।

सार्थकता और अर्थ  खोजने में कभी-कभी  खुशियाँ  पीछे छूट जाती है।

पर जीवन से संतुष्टि के लिये दोनों जरुरी हैं। 

 

 

 

 

जिंदगी के रंग -204

जीवन है इसलिए परेशनियाँ हैं.

जीवन का अर्थ है सीखना अौर आगे बढ़ना ।

हम सजीव हैं, इसलिए चुनौतियाँ हैं.

बदलते रहते जीवन की चुनौती है हर पल में हौसला बनाये रखना।

हम हैं, क्योंकि अपनों ने हमें ऐसा बनाया.

अतः जीवन सार है अौरों की मदद करना।

दुःख है, इसलिए ख़ुशियों का मोल है.

जीवन का रहस्य है खुश रहना।

प्यार है इसलिए जीवन का अस्तित्व है.

अतः जीवन का सौंदर्य प्रेम है।

संगीत सुने अौर खुश रहें

अपने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक स्वंय बने – संगीत खुशी को बढ़ा कर आपके तनाव व चिंता को कम कर सकता है।
Be your own therapist -music can boost happiness and reduce anxiety.

Rate this:

क्या आप जानते हैं गीत, संगीत सुनना हमारे लिए अच्छा है. विभिन्न शोधों और अध्ययन से यह पता चला है खुशियों भरा संगीत हमारा मूड अच्छा करता है. इससे हमारी बेचैनी और तनाव में कमी आती है. इससे एंटीबॉडी का स्तर यानी रोगों के खिलाफ लड़ने की हमारी शारीरिक क्षमता में भी सुधार आता है और पीड़ा या दर्द के अनुभूति में कमी आती है. मनपसंद और मधुर गानों के सुनने से मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन का बहाव होता है. न्यूरोलॉजिकल अध्ययन बताते हैं खुशगवार संगीत हमारे मस्तिष्क के ऐसे केंद्रों को सक्रिय करता है जिससे डोपामिन रिलीज होता है. यही कारण है कि लोरी , भजन,  कीर्तन का प्रभाव सकारात्मक होता है. 

 अपने  को पाना, Your relationship with you

 

खुद को   ना खोने देना

अौरों को खुश करने की कोशिश में।

 अपने  को पाना

लोगों को खोने से अच्छा है।

ठोकर

वक्त ने गुजरते-गुजरते

पलट कर पूछा –

जब भी होते हो खुश या दुखी ,

कहते हो – यह वक्त गुजर जायेगा।

फिर मेरे गुजरने पर याद क्यों करते हो?

हमने कहा, क्योंकि

तुम्हारी ठोकरों ने  हमें तराशा है………………