मुस्कुराते रहें !

खुशियों का मनोविज्ञान, अपने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक स्वंय बने। Be your own therapist -Keep Smiling! It can trick your brain into happiness and boost your health.

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हम खुशियाँ नहीं खरीद सकते है। लेकिन एक मुस्कुराहट से मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन  पैदा कर सकते हैं।  मनोवैज्ञानिकों अौर न्यूरोलॉजिस्टों के खोज बताते हैं – जब आप मुस्कुराते हैं, तब मस्तिष्क की एक रासायनिक प्रतिक्रिया डोपामाइन और सेरोटोनिन सहित कुछ हार्मोनों को छोड़ती है।सेरोटोनिन अौर डोपामाइन खुशी की हमारी भावनाओं को बढ़ाता है।

 हर बार जब आप मुस्कुराते हैं, तब दिमाग में एक  फील गुड  एहसास होता हैं। मुस्कुराहट  तंत्रिका संदेश को सक्रिय करता है। जो आपको स्वस्थ्य  और प्रसन्नचित बनाता है। हैपी हारमोन या  फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर- डोपामाइन, एंडोर्फिन और सेरोटोनिन- सभी तब रिलीज़ होते हैं, जब आपके चेहरे पर एक मुस्कान आती है। साथ-साथ यह चेहरे पर चमक लाता है । यह न केवल आपके शरीर को आराम देता है, बल्कि यह आपके हृदय गति और रक्तचाप को भी कम करता है।

दुर्भाग्य की बात है कि  कई स्थितियों मे चिकित्सकों को  एंटीडिप्रेसेंट दवा से डोपामाइन और सेरोटोनिन को बढ़ाकर चिकित्सा  करना पङता हैं। आप मुस्कुरा कर बङे आराम से हैपी हारमोन या  फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को स्वाभाविक रूप से बढ़ा सकते हैं। 

ज़िंदगी के रंग -192

जी लो ज़िंदगी, जैसी सामने आती है.

सबक़ लो उस से …..

क्योंकि ज़िंदगी कभी वायदे नहीं करती.

इसलिए उससे शिकायतें बेकार है.

और जिन बातों को हम बदल नहीं सकते.

उनके लिए अपने आप से शिकायतें बेकार है.

छोटी-छोटी खुशियां हीं बड़ी खुशियों में बदल जाती हैं

जैसे छोटी दिवाली….से  बड़ी दिवाली ।

शुभ छोटी दिवाली!!!

 

 

शब्द

ना जाने कितने हथियार बने

कितने दवा बनी ,

पर ‘शब्द ‘ में है

सारी शक्ति ……

ख़ुशी …ग़म …. पीड़ा … या तस्सली

देनी हो .

मीठे – खट्टे शब्द या बोली हीं

काफ़ी है.

आवाज़ हीं पहचान है !!

कहते तो हैंआवाज़ हीं पहचान है !!

पर क्या मिला  है कोई ?

 जो  आवाज  से आपकीखुशी या गम जान लें 

अगर  मिलें तो दिल केरीबरखना इन्हें,

बङे खास  होते हैं  ये लोग।

जीवन के रंग – 42

हम सभी के पास

अपनी -अपनी कहानियाँ हैं…..

हम सब किसी ना किसी दौर से गुजरें हैं।

प्यार, नफरत, पसंद, नापसंद,

पछतावा दर्द , दुःख,  खुशी……

जो शायद दूसरे ना समझें।

यह सब तो जीवन के रंग हैं।

जो हमें तोङने के लिये नहीं

जोङने के लिये होते हैं।

खुशी का वह पल !!

हम खुशियों की खोज में न जाने कहाँ-कहाँ भटकते है।बड़े-बड़े चाहतों के पीछे ना जाने कितना परेशान होते हैं। पर, सच पूछो तो खुशी हर छोटी बात में होती है। यह सृष्टि की सबसे बड़ी सच्चाई है।

इस जिंदगी के लंबे सफर में अनेक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ये खुशियां इन उतार चढ़ाव में हमें हौसला और हिम्मत देती हैं। पर अक्सर हम छोटे-छोटी खुशियों को नज़र अंदाज़ कर देते हैं, किसी बड़ी खुशी की खोज में। ऐसा एहसास स्वामी विवेकानंद को भी अपने जीवन के आखरी दौर में हुआ था।

खुशी ऐसी चीज़ नहीं है जो हर समय हमारे पास रहे। यह संभव नहीं है। खुशी और दुख का मेल जीवन के साथ चलता रहता है। हाँ, खुशी की चाहत हमारे लिए प्रेरणा का काम जरूर करती है। कभी किसी के प्यार से बोले दो बोल, बच्चे की प्यारी मुस्कान, फूलों की खूबसूरती या चिड़ियों के चहचहाने से खुशी मिलती है। कभी-कभी किसी गाने को सुन कर हीं चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं या कभी किसी की सहायता कर खुशी मिलती है। 

कठिनाइयों की घड़ी में छोटे-छोटी खुशियाँ उनसे सामना करने का हौसला देती हैं। इस बारे में अपने जीवन की एक घटना मुझे याद आती है। मेरी बड़ी बेटी तब 12 वर्ष की थी। उसके सिर पर बालों के बीच चोट लग गया। जिससे उसका सर फूट गया। मैं ने देखा, वह गिरने वाली है।

घबराहट में मैंने उसे गोद में उठा लिया। जब कि इतने बड़े बच्चे को उठाना मेरे लिये सरल नहीं था। मैंने एक तौलिये से ललाट पर बह आए खून को पोछा। पर फिर खून की धार सिर से बह कर ललाट पर आ गया। वैसे तो मैं जल्दी घबराती नहीं हूँ। पर अपने बच्चे का बहता खून किसी भी माँ के घबराने के लिए काफी होता है। इसके अलावा मेरे घबराने की एक वजह और भी थी । बालों के कारण चोट दिख नहीं रहा था। मुझे लगा कि सारे सिर में बहुत चोट आई है।

मेरी आँखों में आँसू आ गए। आँखें आँसू से धुँधली हो गई। मैं धुँधली आँखों से चोट को ढूँढ नहीं पा रही थीं। मेरी आँखों में आँसू देख कर मेरी बेटी ने मेरी हिम्मत बढ़ाने की कोशिश की।

उसने मेरे गालों को छू कर कहा- “ मम्मी, तुम रोना मत, मैं बिलकुल ठीक हूँ’। जब मैंने उसकी ओर देखा। वह मुस्कुरा रही थी। मैं भी मुस्कुरा उठी। उसकी दर्द भरी उस मुस्कुराहट से जो ख़ुशी मुझे उस समय मिली। वह अवर्णनीय है। मुझे तसल्ली हुई कि वह ठीक है। उससे मुझे हौसला मिला। मेरा आत्मविश्वाश लौट आया। उसकी मुस्कान ने मेरे लिए टॉनिक का काम किया। मैंने अपने आँसू पोछे और घबराए बिना, सावधानी से चोट की जगह खोज कर मलहम-पट्टी किया और फिर उसे डाक्टर को दिखाया।

  मुस्कुरा कर देखो तो सारा जहां हसीन है,
वरना भिगी पलकों से तो आईना भी धुंधला दिखता है।

चेहरे पर चेहरा #मास्क#mask   -कविता 

mask

नकाब , हिजाब , परदे, ओट ,घूंघट , मुखौटे  या मास्क.

कभी  छुपाती  खूबसूरती , कभी बदसूरती 

कभी छुपाती खुशी, कभी ग़म हैं.

कही  फरेब.छुपा होता हैं.

कहीँ  आँसू.

कही दुल्हन का घूंघट , कही धोखे की आहट 

कही धूप -छाँव से ओट.

छउ  नाच या 

सुंदरबन के बाघों को धोखा देते मुखौटे.

                                                     हर जगह चेहरे पर चेहरा   !!!!!!!!

किस  नकाब के  पीछे.
 ना जाने क्या रहस्य छुपा हैं ,

 बंद लिफाफे के  आकर्षण सा .

रहस्यमय मास्क 

 खींचती  हैं हर  नज़र अपनी ओर …..

 

mask 1

 

 

 

 

images from internet.