पहचान

लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।

चेहरे ना अभी तक नहीं आया।

मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –

मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।

पर मेरा भी यही हाल है।

लोग रोज़ चेहरे बदलते रहते हैं।

सौ चेहरे गढ़, मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं,

मनचाहा दिखने के लिए!

पल-पल रंग बदलते चेहरे,

चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।

अपने दिल की सुनो,

दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।

आघात – प्रतिघात  

The true mark of maturity is when somebody hurts you and you try to understand their situation instead of trying to hurt them back.

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कई तरह के लोगों को देखा है।

 कुछ तो खोए रहते हैं अपने आप में, कुछ अपने दर्द में।

पर बीमार अौर खतरनाक वे हैं जिन्हें मजा आता है,

दूसरों को बिन कारण दर्द और तकलीफ पहुंचाने में।

 सबसे सही संतुलित कौन  है?

ऐसे भी लोगों को देखा है,

जो चोट खा कर भी चोट नहीं करते।

आघात के बदले प्रतिघात नहीं करते।

 क्योंकि

वे पहले दूसरे की मनःस्थिति को समझने की कोशिश करते हैं।

 

 

कहानी

जिंदगी के रंग -207

प्रश्न  बङा कठिन है।

 दार्शनिक भी है, तात्त्विक भी है।

पुराना  है,  शाश्वत-सनातन भी  है।

तन अौर आत्मा या कहो रुह और जिस्म !!

इनका  रिश्ता है  उम्रभर का।

खोज रहें हैं  पायें कैसे?

 दोनों को एक दूसरे से मिलायें कैसे?

कहतें हैं दोनों  साथ  हैं।

फिर भी खोज रहें हैं – मैं शरीर हूँ या आत्मा? 

चिंतन-मनन से गांठें खोलने की कोशिश में,

 अौर उलझने बढ़ जातीं हैं।

मिले उत्तर अौर राहें, तब बताना।

 पूरे जीवन साथ-साथ हैं,

पर क्यों मुश्किल है ढूंढ़ पाना ?

 

 

Mouse deer species not seen for nearly 30 years is found alive in Vietnam

प्रकृति हमेशा तालमेल बनाये रखने की कोशिश करती है.
बशर्ते, मानव उसे बर्बाद ना करे!

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distinctly two-tone mouse deer that was feared lost to science has been captured on film foraging for food by camera traps set up in a Vietnamese forest. The pictures of the rabbit-sized animal, also known as the silver-backed chevrotain, are the first to be taken in the wild and come nearly 30 years after the last confirmed sighting.

 

News in detail

 

खुले दरवाजे, शीशे की अजनबी दीवारें, खिड़कियाँ

आसमान छूने की चाहत छोड़,

कैद कर लिया है अपने को,

अपनी जिंदगी को,

खुले दरवाजे और शीशे की कुछ अजनबी दीवारों, खिड़कियों में।

जैसे बंद पड़ी किताबें,

कांच की अलमारी से झांकती हैं अपने को महफ़ुज मान,

पन्नों में अपनी दास्तानों को कैद कर।

अब खाली पन्नों पर,

अपने लफ्ज़ों को उतार

रश्म-ए-रिहाई की नाकाम कोशिश कर रहें हैं।

Painting courtesy- Lily Sahay.

जिंदगी के रंग-188

अपने हों, हवा-ए-फिजा, उड़ता धुँआ या धुंध हो।

जिनके रुख का पता हीं ना हो ,

उन्हें परखने की कोशिश बेकार है ।

क्यों नहीं आज़माना  है, 

तब्सिरा….. समिक्षा करनी है अपनी? 

ईमानदारी से झाँकों अपने अंदर,

या मेरे अंदर…… .आईने ने कहा।

सारे जवाब मिल जायेंगें।

गुमान

गुमान था अपनी फोटोग्राफिक स्मृति पर,
जो देखा उसे याद रखने की फोटो स्मृति क़ाबिलीयत पर,
ना भूलने की क्षमता पर,
फिर देखा अपनी ताकत ही अपनी कमजोरी बनते।
अब लड़ रहे हैं अपने आप से
अपनी यादों से, याददाश्त से,
किसी को विदा किए पलों को,
एक दिन, इक तारीख को भूलने की कोशिश में।

हौसला

तेल खत्म होते दिये की धीमी लौ की पलकें झपकने लगी,

हवा के झोंके से लौ लहराया

अौर फिर

पूरी ताकत से जलने की कोशिश में……

 धधका …..तेज़ जला…. अौर आँखें बंद कर ली।

बस रह गई धुँए की उठती लकीरें अौर पीछे की दीवार पर कालिख के दाग।

तभी पूरब से सूरज की पहली किरण झाँकीं।

शायद दीप के हौसले को सलाम करती सी।

 अपने  को पाना, Your relationship with you

 

खुद को   ना खोने देना

अौरों को खुश करने की कोशिश में।

 अपने  को पाना

लोगों को खोने से अच्छा है।