महाकाल

एक दिन देखा शिव का चिता, भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से ।

समझ नहीं आया इतना डर क्यों वहां से जहां से यह भभूत आता हैं।

कहते हैं, श्मशान से चिता भस्म लाने की परम्परा थी।

पूरी सृष्टि इसी राख  में परिवर्तित होनी है एक दिन।

एक दिन यह संपूर्ण सृष्टि शिवजी में विलीन होनी है।

वहीं अंत है, जहां शिव बसते हैं।

शायद यही याद दिलाने के लिए शिव सदैव सृष्टि सार,

इसी भस्म को धारण किए रहते हैं।

फिर इस ख़ाक … राख के उद्गम, श्मशान से इतना भय क्यों?

कोलाहल भरी जिंदगी से ज्यादा चैन और शांति तो वहां है।

 

 

भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से – वहाँ उपस्थित होने पर भी यह  पूजन देखा महिलाओं के लिए वर्जित है.

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियाँ

मन में उठते

शोर और कोलाहल ,

हलचल , उफान ,लहरें , ज्वार भाटे

को शब्दों……

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियों में

पन्ने पर उतारने पर

ना आवाज़ होती है

ना शोर और

मन भी काव्य की

अपूर्व शांति में डूब जाता है …….

 

 

 

Picture Courtsey: Zatoichi.