जिंदगी के रंग – 208

दुनिया में होङ लगी है आगे जाने की…

किसी भी तरह सबसे आगे जाने की। 

कोई ना कोई तो आगे होगा हीं।  

हम आज जहाँ हैं,

वहाँ पहले कोई अौर होगा….. उससे भी पहले कोई अौर।

ज़िंदगी सीधी नहीं एक सर्कल में चलती है। 

जैसे यह दुनिया गोल है।

ज़िंदगी का यह अरमान, ख़्वाब  –

सबसे आगे रहने का, सबसे आगे बढ़ने का……

क्या इस होड़ से अच्छा नहीं  है –

सबसे अच्छा करने का।

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Image courtesy- google.

शिकवे

शिकवे-शिकायतों के लिए यह ज़िंदगी छोटी है,

पर क्या करें, जो कोई रुका नहीं सुनने के लिये…….

वैसे, ज़िंदगी में लुत्फ़ इन शिकायतों का भी है –

चंद क़तरे अश्क़,

अधूरी आरज़ू -हसरतें…..

और ना- उम्मीद शिकायतें….

गिले तो होंगे हीं.

आवाज़ हीं पहचान है !!

कहते तो हैंआवाज़ हीं पहचान है !!

पर क्या मिला  है कोई ?

 जो  आवाज  से आपकीखुशी या गम जान लें 

अगर  मिलें तो दिल केरीबरखना इन्हें,

बङे खास  होते हैं  ये लोग।

जिँदगी के रंग – 43

जिंदगी की

 यादें भी बङी बेवफा होतीं हैं,

जिन लम्हों पर कोई हक़ नहीं होता,

उन्हें हीं हक़ से याद करते रहतीं हैं,

जीवन के हर लम्हों में उन्हें

अपनेपन से 

शामिल करते रहतीं हैं।

इन इत्रों, खुशबू, सुगंध से परे

इन दुनियावी  रंगों , इत्रों, खुशबू, सुगंध से परे

कोई अौर भी राग-रंग,  महक है ,

जो  दिल और आत्मा को रंगती हैं

जीवन यात्रा में।

यह  खुशबू   हमें ले कर  चलती रहती है,

प्यार भरे जीवन के अनन्त  पथ पर।