मित्र

खोज रहें हैं, एक सुदामा सा कोई मिल जाए !

वैसे तो मीत बनाने को

ना जाने कब से ढूँढ रहें हैं कान्हा को भी.

अभी तक वो तो मिले नहीं.

कहते हैं, अहंकार सेकृष्ण को पाया नहीं जा सकता.

अब मीरा-राधा सा निश्छल हृदय कहाँ से लायें?

जो कृष्ण मिल जायें?

इसलिए खोज रहें हैं,

एक सुदामा सा तो कोई मित्र मिल जाए !

 

शुभ मित्रता दिवस !!!!

फर्क

एक प्रश्न अक्सर दिलो-दिमाग में घूमता है.

एक शिशु जहाँ जन्म लेता है। जैसा उसका पालन पोषण होता है।

वहाँ से उसके धर्म की शुरुआत होती है।

जो उसे स्वयं भी मालूम नहीं।

तब कृष्ण के नृत्य – ‘रासलीला’,

सूफी दरवेशओं के नृत्य ‘समा’ में क्यों फर्क करते हैं हम?

ध्यान बुद्ध ने बताया हो या

कुंडलिनी जागरण का ज्ञान उपनिषदों से मिला हो।

क्या फर्क है? और क्यों फर्क है?

शुभ देव दिवाली – कार्तिक पूर्णिमा

शुभ कार्तिक पूर्णिमा !!

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कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली या देव दिवाली कहा जाता है. कार्तिक पूर्णिमा का  त्योहार दीपावली के 15 दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन माता गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन काशी  के सभी गंगा घाटों को दीयों की रोशनी से  रौशन किया जाता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है.

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।

महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद आज के दिन पांडवों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए स्नान कर दीपदान करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की थी.

सिख सम्प्रदाय में कार्तिक पूर्णिमा का दिन प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था।

कहते है, कार्तिक पूर्णिमा को गोलोक के रासमण्डल में श्री कृष्ण ने श्री राधा का पूजन किया था।

मान्यता है कि, कार्तिक पूर्णिमा को ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किया था।

 

Image courtesy- Aneesh

ज़हर

अर्जून ने कृष्ण से पुछा –

ज़हर क्या है ?

कृष्ण ने बहुत सुन्दर जबाब दिया –

हर वो चीज़ , जो ज़िन्दगी में

आवश्यकता से अधिक होती है ,

वही ज़हर है , फ़िर चाहे वो –

ताक़त हो ,

धन हो ,

भूख हो ,

लालच हो ,

अभिमान हो ,

आलस हो ,

महत्वकाँक्षा हो ,

प्रेम हो

या घृणा.

 

क्या फिर कृष्ण ने जन्म लिया है?

NEWS-

61 MORE KIDS DIE IN LAST 72 HOURS AT GORAKHPUR HOSPITAL

Farrukhabad: 49 infants die in UP hospital

गोरखपुर में 72 घंटे में 46 बच्चों की मौत

अब फर्रुखाबाद में 49 बच्चों की मौत

हर रोज नन्हें बच्चों के मृत्यु की खबरें
दहशत पैदा कर रहीं हैं ।
कौन सी आसुरी वृत्ति इनके मौत का कारण है?

 द्वापर युग में
मथुरा राज कंस ने आकाशवाणी सुनी – 
देवकी का आठवाँ बालक उनका वध करेगा। 

कुपित क्रूर कंस ने
देवकी के समस्त संतानों को मार ङाला।
आठवीं कन्या को मारना चाहा ,

तब वह
काली रुपा आसमान में जा कर बोल पङी —
“तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है।”

मृत्यु भय  ग्रस्त कंस ने सभी
नवजात शिशुओं को मरवाना शुरु कर दिया।

क्या आज फिर उसी कुकाण्ङ की पुनरावृत्ति हो रही है?

बढ़ते पाप – अनाचार के नाश अौर
धर्म की स्थापना के लिये, 
मस्तक पर मोर मुकुट
वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि धारण करने वाले विष्णुवतार
 कृष्ण ने क्या फिर कहीं जन्म लिया है? 

यह ताङंव रुकेगा क्या?

पहचान – कविता #JudgingPeople- poetry

मित्र आगमन पर नंगे पैर दौङ पङे कृष्ण,

ना कान्हा ने सुदामा  को आंका।

ना राम ने सबरी , हनुमान  को नापा।

हम किसी से मिलते हीं सबसे पहले,

एक- दूसरे को  भांपते है, आंकते है,

आलोचना -समालोचना करते हैं।

तभी सामने वाले का मोल तय करते हैं। 

रुप, रंग, अौकात …..

देख कर  लोगों को पहचानते हैं।

भूल जाते हैं , अगर  ऊपरवाला हमारा  मोल लगाने लगेगा,

तब हमारी पहचान क्या होगी ? हमारा मोल क्या होगा? 

Indispose,  Edition 172 –How do you feel when people judge you? Do you judge people as well? #JudgingPeople

image from internet.

सौंदर्य सार- कविता

 

I searched for God and found only myself.
I searched for myself and found only God.

पेङ की शाखाअों पर लगे फूलों में

हम  सौंदर्य सार खोजते हैं,

पर क्यों नहीं हम जड़ों के बारे में सोचतें?

शायद वहीं सब कुछ मिल जाए………

कृष्ण को खोजते है किताबों में,

क्यों नहीं झाँकतें अपने अंदर ?

पतझङ अौर बसंत मे 

खुबसूरत  पत्ते अौर  फूल,

आते हैं अौर  फिर साथ छोङ जाते हैं,

पर जङें नहीं बदलतीं।

                    वही उन  का आधार हैं……

image from internet.