ख़ुशी की तलाश

कुछ लोग दिखतें हैं हमेशा ख़ुश।

ज़रूरी नहीं वो हों भी ख़ुश।

दरअसल वो सीख लेते है रहना ख़ुश।

वरना किसे ज़िंदगी रुलाती नहीं?

कुछ धोखे, कुछ अपने सताते नहीं?

जिये हँस कर या रो कर,

यह अपनी फ़ितरत है।

सुख-दुख के लम्हे आते हैं और

गुज़र जाते हैं।

तमाम उम्र यूँ हीं ख़ुशी की तलाश में

गुज़र जाती है।

सफ़र ज़िंदगी की

अपेक्षायें, सफ़ाई और

कई जज़्बा-ए-बेनाम,

आने लगे सफ़र-ए-ज़िंदगी के बीच।

जो चैन और सुकून छीन ले,

तब

लोगों को ना करे कोशिश बदलें की।

आसपास के लोगों को बदल दें।

अर्थ- जज़्बा-ए-बेनाम: अनाम अहसास / nameless emotions.

ख़्वाबों की इबादत

ज़िंदगी ख़्वाबों में मसरूफ़ ,

ख़्वाबों की इबादत में मसरूफ़।
नींद भरी आँखें अपनी

दर्द भरी कहानी किसे सुनायें?

ज़िंदगी की धूप

सफलता के साँचे में

ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में

तपना और चलना होगा।

रात की दहलीज़ पर

दहलीज़ पर जलता दीया,

पाथेय बन राहें

उनके लिए रौशन है करता,

जिन्हें वापस आना हो।

ज़ो लौटें हीं ना

उनके लिए क्यों दीया जलाना

रात की दहलीज़ पर?

काग़ज़ की कश्तियाँ

बारिश में काग़ज़ की कश्तियाँ तैराते बच्चे

कल दुनिया के समंदर में ग़ुम हो जाएँगें या

खुद विशाल सागर बन जाएँगें।

तितलियाँ पकड़ते नन्हे फ़रिश्ते

दुनिया में गुमनाम हो जाएँगे या

अपनी सफ़ल दुनिया सज़ायेगें।

बच्चों का बचपना बनता है उनकी ज़िंदगी।

ये बचपन का लम्हा पल में गुज़र जाएगा।

जैसा आज़ देंगे, कल वे वही बन,

वही लौटाएँगें।

Psychological fact- Childhood Emotional Neglect May Impact in negative ways Now and Later.