सारी कायनात है उसकी!

वह है हर जगह,

फिर भी जाते हैं मंदिरों में

ताकि उसे महसूस कर सकें।

वह है हमारे अंदर,

फिर भी जपते हैं मंत्र

ताकि उसे हर वक्त याद रख सकें।

कितनी गहरी है ये सीखें।

अफ़सोस ग़लतियाँ करने समय

लोग अक्सर भूल जातें है।

सारी कायनात है उसकी,

कि वह हर वक्त देख रहा है हमें।

Psychological Fact – The process of being watched affects our performance positively. (Hawthorne effect)

कायनात और कोरोना

हम सब न जाने कब से धरा, प्रकृति और उसकी व्यवस्था को अस्वीकार कर रहें हैं. उससे खिलवाड़ कर रहें हैं. हम कायनात या इस दुनिया के नियम व तालमेल को रोज़ तोड़ते और भंग करते हैं। धरा, जल, सागर, आकाश, अंतरिक्ष को कचरा से भरते जा रहें हैं.

कभी हम सब ने सोंच नहीं कि प्रकृती हमें रिजेक्ट या अस्वीकार कर दें. तब क्या होगा? आज वही हो रहा है. शायद इस धरा को मानव के अति ने बाध्य कर दिया है. वह अपना राग, नाराज़गी दिखा रही है. कहीं मानव भी विलुप्त ना हो जाए मैमथ, डोडो, डायनासोर की तरह या विलुप्त निएंडरथल – विलुप्त मानव प्रजातियों की तरह. प्रकृति के इस इशारे को संकेत या चेतावनी मान लेने का समय आ गया है. प्रकृति और मानव का सही सामंजस्य अनमोल है. यह समझना ज़रूरी है.

 

 कायनात, दुनिया अौर खुदाई

सारी दुनिया  की रीत- रिवाजों को पढ़ा।

ना जाने कितनी सारी किताबें को  पढ़ा।

पर नहीं  पढ़ा , तो बस अपने आप को।

सारी कायनात को पढ़ कर समझ आया……

अपने अंदर हीं है

 सारी कायनात, दुनिया अौ सारी खुदाई।

 

दिवाली में दीये

किसी ने पूछा –

दिवाली में दीये तो जला सकतें हैं ना?

ग्लोबल वार्मिंग की गरमाहट

तो नहीं बढ़ जायेगी……

नन्हा दीया हँस पङा।

अपने दोस्तों को देख बोला –

देखो इन्हें जरा…..

सारी कायनात  अपनी गलतियों से जलाने वाले

हमारी बातें कर रहें हैं।

जैसे सारी गलती हमारी है।