दूरियाँ-नज़दीकियाँ

ना दूरी ना नज़दीकी

रिश्ते बनाती या बिगड़ती है।

वह तो सरसब्ज़ ….सदाबहार

प्रीत और चाहत होती है।

राधा पास थी,

पर अपनी बनी नहीं।

मीरा सदियों दूर थी,

पर कान्हा उनके अपने थे।

मित्र

खोज रहें हैं, एक सुदामा सा कोई मिल जाए !

वैसे तो मीत बनाने को

ना जाने कब से ढूँढ रहें हैं कान्हा को भी.

अभी तक वो तो मिले नहीं.

कहते हैं, अहंकार सेकृष्ण को पाया नहीं जा सकता.

अब मीरा-राधा सा निश्छल हृदय कहाँ से लायें?

जो कृष्ण मिल जायें?

इसलिए खोज रहें हैं,

एक सुदामा सा तो कोई मित्र मिल जाए !

 

शुभ मित्रता दिवस !!!!

मुरली प्यारी है या मोर मुकुट?

विष्णु के अष्टम अवतार, 

देवकी के आठवें पुत्र,

अष्ट पत्नियाँरुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा,

कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मण को

राधा को, मीरा को, गोपियों को, 

 कान्हा क्यों सभी को अच्छे लगते हैं ?

  मुरली प्यारी है या मोर मुकुट? या स्वंय केशव?

कोई नहीं जान पाया…..

बस इतना हीं काफी है – वे अच्छे लगतें हैं।