लोग

एक नरम मुलायम धूप

हौले हौले चलती कांच के दरवाजे से

गुजर कर पैरों तक आ गई.

गुनगुनी सी धूप सर्द मौसम में

नरम रजाई सी तलवों को ढक कर सुकून देने लगी .

कुछ ही देर में धूप की तेज़ होती गरमाहट चुभने लगी ।

कुछ लोग भी ऐसे होते हैं,

शुरू में नरम और बाद में चुभने वाले।

ज़िंदगी के रंग – 194

ज़िंदगी कट गई भागते दौड़ते.

थोड़ा रुककर कर,

ठहर कर देखा – चहचहातीं चिड़ियों को,

ठंड में रिमझिम बरसती बूँदे,

हवा में घुली गुलाबी ठण्ड……

खुशियाँ तो अपने आस-पास हीं बिखरीं हैं,

नज़रिया और महसूस करने के लिए फ़ुर्सत….

वक़्त चाहिए.

आँधी और दिया

अतीत की  स्मृतियों का बोझ दम घोटने लगता है . अौर उनमें जीने की चाहत भी होती है।

यह कोशिश, कुछ ऐसी बात है जैसे – आँधियाँ भी चलती रहें, और दिया भी जलता रहे..।

कोलाहल में शांति की खोज !

दुनिया की महफ़िलों से सीखने को कोशिश में हैं

दुनियादारी के क़ायदे और

इस दुनिया के शोर शराबे, कोलाहल के बीच,

मन और आत्मा में शांति बनाए रखने की रीत.

कई बातें अक्सर भूल जातें

बहुत सी चीज़ें रख कर अक्सर भूल जातें है.

कई नाम, कई काम अक्सर भूल जातें हैं.

पर जो यादें मायूस करतीं हैं,

वे क्यों याद रहतीं हैं?

जबकि कई बातें अक्सर भूल जातें हैं.

स्याही वाली क़लम

अब स्याही वाली क़लम से लिखना छोड़ दिया है.

कब टपकते  आँसुओं से 

 पन्ने पर पर अक्षर अौ शब्द फैल जाते  हैं।

 कब आँखें धुँधली हो जातीं हैं।  

पता हीं नहीं चलता है।

 

इंतज़ार

कहते हैं, जो कुछ  खोया हैं,

वह वापस आता है।

पर कब तक करें इंतज़ार यह तो बता दो?

Don’t grieve. Anything you lose comes round in another form.

Rumi ❤️