जीवन के बाद का जीवन

रूमी की पंक्तियों आपको क्या कहतीं हैं? ज़रूर बतायें. आप सबों के विचार मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं.
रूमी को मैंने कुछ साल पहले मायूसी के पलों में, गहराई से पढ़ना शुरू किया था. अब गीता, कबीर, रूमी, नानक और ढेरों संतों की बातों और विचारों में समानता पाया. इनकी पंक्तियाँ मुझे गहरा सुकून देतीं हैं.

Rate this:

 

जीवन के बाद के जीवन, को जानने की लालसा इतनी प्रबल है कि ,

मन व आत्मा को हमेशा खींचता है अपनी ओर. 

जीवन के अंत  से  ङरे बिना।

उसमें अब एक लालसा और जुड़ गई है – किसी से मुलाक़ात की.

मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ एक और जहाँ… दुनिया हैं.

भीड़ और परखने वाली नज़रों से दूर…. सही ग़लत से दूर .

What did Rumi mean when he said:

Out beyond ideas of wrongdoing 
and rightdoing there is a field.
I’ll meet you there.

When the soul lies down in that grass
the world is too full to talk about.

Rumi ❤️

 

मैं – कविता Self- Poetry

 

You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.

                                                          Swami Vivekananda

  जीवन की  परिपूर्णता —-

अगर यह लौकिक हो  – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,

या  संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।

तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।

क्या  खोजता  है यह ?

क्या खींचती  है  इसे अपनी अोर?

यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?

शायद अपने आप को   ढूँढ़ने  

मैं कौन हूँ??

                                                                              या

मैं से दूर  ?

 

Image from internet.