Stay Happy, Healthy and Safe – 80

कबीरदास का हिंदी दोहा ब्लॉगर स्वामी येसूदास के विशेष अनुरोध पर –

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प्रेम ना बारी उपजै प्रेम ना हाट बिकाय
राजा प्रजा जेहि रुचै,शीश देयी ले जाय।
– कबीर
अर्थ – (प्रेम ना तो खेत में पैदा होता है

और न ही बाजार में विकता है।

राजा या प्रजा जो भी प्रेम का

इच्छुक हो वह अपना सर्वस्व

त्याग कर प्रेम प्राप्त कर सकता है।)

 

Meaning – Love does not grow on trees

 or brought in the market,

 but if one wants to be “loved”

 one must first know

 how to give unconditional love.

Kabir

 

Posting Kabir’s Hindi couplet/ doha along with its meaning on the request of Blogger Swamiyesudas,  a Christian Sannyasi, passionately interested in creating a Better World.

आँखें ख़्वाब, औ सपने बुनतीं हैं….

आँखें ख़्वाब, औ सपने बुनतीं हैं,

हम सब बुनते रहते हैं,

ख़ुशियों भरी ज़िंदगी के अरमान।

हमारी तरह हीं बुनकर पंछी तिनके बुन आशियाना बना,

अपना शहर बसा लेता है.

बहती बयार और समय इन्हें बिखेर देते हैं,

यह  बताने के लिये कि… 

 नश्वर है जीवन यह।

मुसाफिर की तरह चलो। 

यहाँ सिर्फ रह जाते हैं शब्द अौर विचार। 

वे कभी मृत नहीं होते।

जैसे एक बुनकर – कबीर के बुने जीवन के अनश्वर गूढ़ संदेश। 

 

 

बुनकर पंछी- Weaver Bird.

जीवन के बाद का जीवन

रूमी की पंक्तियों आपको क्या कहतीं हैं? ज़रूर बतायें. आप सबों के विचार मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं.
रूमी को मैंने कुछ साल पहले मायूसी के पलों में, गहराई से पढ़ना शुरू किया था. अब गीता, कबीर, रूमी, नानक और ढेरों संतों की बातों और विचारों में समानता पाया. इनकी पंक्तियाँ मुझे गहरा सुकून देतीं हैं.

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जीवन के बाद के जीवन, को जानने की लालसा इतनी प्रबल है कि ,

मन व आत्मा को हमेशा खींचता है अपनी ओर. 

जीवन के अंत  से  ङरे बिना।

उसमें अब एक लालसा और जुड़ गई है – किसी से मुलाक़ात की.

मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ एक और जहाँ… दुनिया हैं.

भीड़ और परखने वाली नज़रों से दूर…. सही ग़लत से दूर .

What did Rumi mean when he said:

Out beyond ideas of wrongdoing 
and rightdoing there is a field.
I’ll meet you there.

When the soul lies down in that grass
the world is too full to talk about.

Rumi ❤️

 

मैं – कविता Self- Poetry

 

You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.

                                                          Swami Vivekananda

  जीवन की  परिपूर्णता —-

अगर यह लौकिक हो  – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,

या  संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।

तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।

क्या  खोजता  है यह ?

क्या खींचती  है  इसे अपनी अोर?

यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?

शायद अपने आप को   ढूँढ़ने  

मैं कौन हूँ??

                                                                              या

मैं से दूर  ?

 

Image from internet.