दर्पण का सच !

जब सच्चा अक्स देखना या दिखाना हो,

 तब आईना याद आता है।

पर सब  भूल जाते हैं दर्पण तो छल करता है।

वह हमेशा उलटी छवि दिखाता है। 

  इंसानों की फितरत भी ऐसी होती है शायद ।

पर अंतर्मन….अपने मन का  आंतरिक दर्पण क्या कहता है?

वह तो कभी छल नहीं करता।

 

औरन को शीतल करे, Like a cool breeze in summer

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय |

औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय ||

 

ऐसी भाषा बोलें जिससे आपके मन का गर्व घमंड दूर हो । इस से
सुनने वाले  निर्मल और शीतल होंगे और आप भी शीतल और पवित्र होगें।

 

Speak in words so sweet, that fill the heart with joy
Like a cool breeze in summer, for others and self to enjoy

 

~~~Kabir