एकांत

एकांत

वह नशा है,

जिसकी लत लगे,

तो छूटती नहीं।

भीड़ तो वह कोलाहल है,

जो बिना भाव

मिलती है हर जगह।

आत्मनिरीक्षण !

अकेलापन और एकांत में अंतर है. अकेलापन उबाता है. जब कि एकांत आत्मनिरीक्षण के अवसर देता है।ज़िंदगी में ज़्यादा मूल्यवान है, मन की शांति और दिल में सहानुभूति.

Continue reading “आत्मनिरीक्षण !”