तहज़ीब

कुछ से दूरी है ज़रूरी,

अपने आप से इश्क़ करने के लिए।

ये तहज़ीब सिखाते है,

ख़ामियों के परे ज़िंदगी देखने की।

वक्त की कहानी

यह तो वक़्त वक़्त की बात है।

टिकना हमारी फ़ितरत नहीं।

हम तो बहाव ही ज़िंदगी की।

ना तुम एक से रहते हो ना हम।

परिवर्तन तो संसार का नियम है।

पढ़ लो दरिया में

बहते पानी की तहरीरों को।

बात बस इतनी है –

बुरे वक़्त और दर्द में लगता है

युग बीत रहे और

एहसास-ए-वक़्त नहीं रहता

सुख में और इश्क़ में।

मन का सुकून

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।

कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा

रिश्ता बना कर देखो।

लोगों को अपने जीवन के

दायरे और सीमा बता कर देखो।

ग़र मन का सुकून चाहिए,

दूसरों के बदले खुद के लिए

जीवन जी कर देखो।

कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।

इश्क़ तन्हाईयों से

तन्हाईयाँ ख़्वाबों तक जाने की राहें बनातीं हैं।

हौसला हो एकांत से इश्क़ करने का।

तो तन्हाईयाँ मंज़िल पाना आसान बनातीं हैं।

इश्क़

कुछ मोहब्बतें

जलतीं-जलातीं हैं।

कुछ अधुरी रह जाती हैं।

कुछ मोहब्बतें अपने

अंदर लौ जलातीं हैं।

जैसे इश्क़ हो

पतंग़े का चराग़ से,

राधा का कृष्ण से

या मीरा का कान्हा से।