इंतज़ार है!

इंतज़ार है, वो दिन कब आएगा,

जब यह दिन ना पड़े मनाना।

जलते चराग़ सा ए’तिबार है,

मुद्दत से देखते ख़्वाब का आसार है।

जब बराबर की ज़िंदगी हो,

बराबर का मान हो।

इंतज़ार है उस दिन का……

11th October 2022: International

Day of the Girl Child. The theme

for the 2022 International Day of

the Girl Child was “Digital

generation: Our generation.”

शाम की दहलीज़ पे !!

हमेशा की तरह,

आज भी शाम की दहलीज़ पे,

आफ़ताब आसमान में सिंदूर फैलाए

इंतज़ार करता रहा चाँद का और तारों की बारात का.

क्या वह जानता नहीं

उसके तक़दीर में इंतज़ार और ढलना लिखा है?

 

दिनों की गिनती – लॉकङाउन का 50वाँ दिन

जिंदगी के पचास दिन बीत गये….कम हो गये।

बिना कुछ कहे-सुने, चुपके से एक शाम अौर ढल गई।

दिनों की गिनती शायद हीं कभी इतनी शिद्दत से की होगी।

यह भी एक यात्रा है।

मालूम नहीं कितनी लंबी।

कितने सबकों…पाठों के साथ।

 ना शिकवा है ना गिला है।

पर यात्रा जारी है।

आशा भरे  नये दिन, नई सुबह के इंतज़ार के साथ।

 

Image Courtesy- Chandni Sahay

इंतज़ार

कहते हैं, जो कुछ  खोया हैं,

वह वापस आता है।

पर कब तक करें इंतज़ार यह तो बता दो?

Don’t grieve. Anything you lose comes round in another form.

Rumi ❤️

 

नज़रें उठाना और गिराना

ढेरों बातें और यादें बटोरे

गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे

इंतज़ार में,  राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..

उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना

सारे ल़फ्ज ….अल्‍फाज़ चुरा ले गया।